31 अगस्त, 2025 को पश्चिमी सूडान के मार्रा पर्वतीय क्षेत्र में आए अचानक और भीषण भूस्खलन में कम-से-कम 1,000 लोगों की मौत हो गई, जैसा कि सूडान लिबरेशन मूवमेंट/आर्मी (SLM/A) ने पुष्टि की। भारी बारिश के बाद हुई इस त्रासदी ने गांव तरसिन (Tarasin) को पूरी तरह तबाह कर दिया, और बतौर चौंकाने वाला विवरण केवल एक बच्चा ही जीवित बच पाया।
मदद के लिए पुकार:
SLM/A ने संयुक्त राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय राहत एजेंसियों से तुरंत आपातकालीन सहायता और शवों को निकालने में सहयोग की गुहार लगाई है। क्षेत्र में चल रहे गृहयुद्ध ने सहायता पहुंचाने में भारी बाधाएं खड़ी कर रखी हैं। दरअसल, इन इलाकों की पहुंच मुश्किल बनी हुई है क्योंकि सूडानी सेना और पैरामिलिट्री RSF के बीच युद्ध का दूसरा वर्ष पूरे हो चुका है।
बचपन शर्मसार:
जबकि मार्रा में प्रकृति का कहर बताया गया, दूसरी ओर अल-फाशिर (El-Fasher) शहर, जो कि उत्तर दारफुर की राजधानी है, में बच्चों का संकट किसी आइना की तरह मनुष्य के समक्ष खड़ा है। UNICEF ने चेतावनी दी है कि यहां “child suffering का epicentre” बन चुका है। लगभग 260,000 लोग, इसमें से आधे बच्चे और कम-से-कम 6,000 बच्चे गंभीर कुपोषण से जूझ रहे हैं, जिनमें से कई की जान जोखिम में है।
भुखमरी और युद्ध:
इसके अलावा, EL-FASHER पर RSF का 16 महीने से लगातर घेरा बना हुआ है। आदान-प्रदान अवरुद्ध है, आपूर्ति कट चुकी है, और भोजन, दवा, पानी जैसे बुनियादी संसाधन तक सीमित पहुचें हैं। UNICEF ने सभी संबंधित पक्षों से “humane pause” की मांग की है ताकि तुरंत और सुरक्षित रूप से राहत पहुंच सके।



