इंदौर,27अगस्त: मध्य प्रदेश की मेट्रो परियोजना को एक और बड़ा विस्तार मिलने जा रहा है। इंदौर-उज्जैन-पीथमपुर कॉरिडोर पर मेट्रो चलाने की तैयारी अब आधिकारिक रूप से शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के लिए परामर्श शुल्क को मंजूरी दे दी है।
राज्य सरकार द्वारा बुलाई गई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में यह फैसला लिया गया कि दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (DMRC) को डीपीआर तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। डीएमआरसी को प्रति किलोमीटर 9 लाख रुपये (जीएसटी सहित) की दर से यह काम सौंपा गया है।
दो चरणों में होगा मेट्रो नेटवर्क का विस्तार
इस परियोजना को दो प्रमुख चरणों में विभाजित किया गया है:
पहला चरण: श्री महाकालेश्वर, उज्जैन से शुरू होकर इंदौर के लवकुश चौराहा तक।
दूसरा चरण: लवकुश चौराहा से पीथमपुर तक।
इन दोनों चरणों में मेट्रो का रूट ऐसे तय किया जाएगा जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूती मिले और यात्रा का समय भी कम हो।
उपनगरों को भी मिलेगा फायदा
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जानकारी दी कि यह मेट्रो परियोजना केवल इंदौर और भोपाल तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आस-पास के उपनगरों को जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह एक दीर्घकालिक योजना है, जिसे पूरा करने में 20 से 25 वर्ष तक का समय लग सकता है, लेकिन राज्य सरकार इसकी शुरुआत जोरशोर से कर चुकी है।
संभावित समयसीमा: कब दौड़ेगी मेट्रो?
फिलहाल उज्जैन से पीथमपुर तक मेट्रो लाइन के लिए सर्वेक्षण कार्य जारी है। मंत्री विजयवर्गीय ने उम्मीद जताई है कि अगले 4 से 5 वर्षों में यह मेट्रो सेवा जनता के लिए शुरू की जा सकती है। इस रूट के बीच में प्रमुख शहर इंदौर होने से यात्रियों को उज्जैन से पीथमपुर तक आने-जाने में बेहद सहूलियत मिलेगी।
देवास और धार तक भी योजना
इंदौर से देवास और धार तक मेट्रो नेटवर्क को विस्तार देने की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं। इसके लिए संबंधित क्षेत्रों में ट्रैफिक और जनसंख्या का सर्वे किया जाएगा, और यदि परियोजना व्यावसायिक रूप से संभव हुई तो आगे की योजना को भी अमलीजामा पहनाया जाएगा।



