Vedant Samachar

भूल जाओ अब फेसबुक-यूट्यूब…INDIA के इस दोस्‍त ने बैन किए सारे सोशल प्‍लेटफॉर्म, 16 के बाद ही मिलेगा एक्‍सेस

Vedant Samachar
3 Min Read

आगामी चार महीनों के भीतर लागू होने जा रहे एक नए कानून के तहत, 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों को फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक, एक्स (पूर्व में ट्विटर), यूट्यूब, स्नैपचैट और रेडिट जैसे सोशल मीडिया मंचों के उपयोग से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।

सरकार के अनुसार, सोशल मीडिया कंपनियों को 10 दिसंबर 2025 तक सभी नाबालिग उपयोगकर्ताओं के मौजूदा खाते हटाने होंगे और आयु सत्यापन तकनीक के माध्यम से उन्हें नए खाते बनाने से रोकने के लिए “उचित कदम” उठाने होंगे। यह प्रतिबंध इतना कड़ा होगा कि माता-पिता की अनुमति से भी बच्चे इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक पहुंच नहीं पाएंगे।

विवाद जारी, लेकिन प्रतिबंध तय
इस कानून को लेकर आस्ट्रेलिया में तीखी बहस छिड़ी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जहां सोशल मीडिया बच्चों के लिए आत्म-अभिव्यक्ति और सामाजिक जुड़ाव का जरिया है, वहीं इसकी लत, ऑनलाइन जोखिम और स्क्रीन टाइम बढ़ना चिंता का विषय है।

एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, हर पांच में से दो बच्चे स्वयं को अकेला महसूस करते हैं। ऐसे में ऑनलाइन जुड़ाव उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। इसके बावजूद, विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग बच्चों की नींद, ध्यान और मानसिक स्थिति को प्रभावित करता है।

विशेषज्ञों के सुझाव: बच्चों को कैसे करें तैयार
विशेषज्ञों ने अभिभावकों के लिए पांच प्रमुख सुझाव साझा किए हैं, ताकि वे बच्चों को इस बड़े बदलाव के लिए सहजता से तैयार कर सकें:

अभी से बातचीत शुरू करें:
10 दिसंबर का इंतज़ार न करें। बच्चों को यह समझाना ज़रूरी है कि यह कदम उनके हित में क्यों उठाया जा रहा है।

धीरे-धीरे दूरी बनाएं:
सोशल मीडिया से अचानक दूरी बच्चों के लिए कठिन हो सकती है। हर हफ्ते स्क्रीन टाइम में 25% की कमी लाकर धीरे-धीरे सोशल मीडिया से हटाया जा सकता है।


विकल्प उपलब्ध कराएं:

सोशल मीडिया के स्थान पर खेल, संगीत, कला, हैंडक्राफ्ट, स्वयंसेवा या सामूहिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाए, जिससे बच्चे सामाजिक और रचनात्मक रूप से जुड़ाव महसूस कर सकें।


ऑफलाइन संबंधों को प्रोत्साहित करें:

बच्चों को समुदाय में सक्रिय होने, दोस्तों से आमने-सामने मिलने और समूह में कार्य करने के लिए प्रेरित करें।

खुद उदाहरण बनें:
माता-पिता यदि खुद स्क्रीन टाइम सीमित करें और ऑफलाइन गतिविधियों में भाग लें, तो बच्चे भी इसे अपनाने में सहज महसूस करेंगे।

नया कानून: एक चुनौती, लेकिन अवसर भी

विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रतिबंध एक अवसर के रूप में भी देखा जा सकता है — जिससे बच्चे डिजिटल और वास्तविक जीवन में संतुलन बनाना सीख सकते हैं। हालांकि इसकी राह आसान नहीं होगी, लेकिन समय रहते की गई तैयारी इस संक्रमण को सहज बना सकती है।

Share This Article