बच्चे की किलकारी हर परिवार का सपना होती है. शादी के बाद फैमिली प्लानिंग करना ज्यादातर कपल्स का सपना होता है. लेकिन शादी के बाद बच्चा न होना उस सपने के टूटने जैसा है. कभी-कभी महिला मां न बनने कारण डिप्रेशन में भी चली जाती है. ऐसी ही कहानी है निशा की, जो नौ सालों से माँ बनने का इंतजार कर रही थीं. शादी के दो साल के बाद से ही निशा मां बनना चाहती थी मगर हर बार निराशा हाथ लगी.
निशा ने इस मामले के लेकर कई तारे डॉक्टर्स से सलाह ली, टेस्ट कराए. नतीजा न निलकने पर निशा ने IVF का रास्ता चुना. उम्मीद थी इस बार निशा मां बन पाएंगी लेकिन यहां भी निराशा ही हाथ लगी. दूसरी बार निशा ने फिर से हिमम्त जुटाई और दोबारा IVF कराया, पर इस बार भी हार ही मिली. तीसरी बारी के लिए निशा आर्थिक रूप से भी टूट चुकी थी. इसके चलते तनाव, बोझ और मां न बनने का सपना निशा को परेशान कर रहा था.
आयुर्वेदा ने दी नई उम्मीद
निशा की एक सहेली ने उन्हें आयुर्वेदा के बारे में बताया. शुरुआत में उन्हें भरोसा नहीं हुआ कि जड़ी-बूटियाँ और पंचकर्म जैसी थेरेपी से कुछ बदल सकता है. लेकिन अंदर ही अंदर वे जानती थीं कि आखिरी उम्मीद को भी आजमाना चाहिए. उन्होंने दिल्ली के एक आयुर्वेदिक क्लिनिक का रुख किया और पहली बार लगा कि शायद जिंदगी उन्हें एक और मौका देने वाली है.
खराब लाइफस्टाइल मां बनने से रोक सकती है
दिल्ली मेंआयुर्वेदा की डाक्टर और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. चंचल शर्मा ने उनके केस को गहराई से समझा. टेस्ट से पता चला कि असली समस्या केवल मेडिकल नहीं बल्कि लाइफस्टाइल से जुड़ी हुई थी. निशा बहुत तनाव लेती थीं, देर रात तक जागती रहती थीं और खानपान भी बिल्कुल संतुलित नहीं था. यही वजह थी कि उनके एग की क्वालिटी खराब हो रही थी और गर्भाशय तक खून का प्रवाह भी ठीक से नहीं पहुंच रहा था. डॉक्टर ने उन्हें हिम्मत दिलाई कि ये सब बदला जा सकता है.
लाइफस्टाइल सुधारा गया
इलाज की शुरुआत जीवनशैली सुधारने से हुई. समय पर सोना-जागना, संतुलित खाना, और हल्की-फुल्की एक्सरसाइज उनकी दिनचर्या का हिस्सा बनाई गई. साथ ही आयुर्वेदिक दवाइयों से एग की क्वालिटी पर काम किया गया. गर्भाशय में ब्लड फ्लो को बेहतर करने के लिए पंचकर्म थेरेपी दी गई. शुरुआत के कुछ हफ्तों में ही निशा ने खुद को हल्का और पॉजिटिव महसूस करना शुरू किया. तीन महीने के इलाज ने उन्हें मानसिक और शारीरिक, दोनों रूप से मजबूत कर दिया.
आर्युवेद से बच्चा हुआ कंसीव
अब वह समय आ चुका था जिसका इंतजार नौ साल से था. डॉक्टर की सलाह पर उन्होंने फिर से प्रेग्नेंसी ट्राई किया और इस बार नतीजा चौंकाने वाला था निशा नैचुरली कंसीव कर चुकी थीं. वह पल उनके लिए सिर्फ एक जीत नहीं बल्कि जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी थी. आज निशा का अनुभव उन तमाम महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण है जो बार-बार असफलता से टूट रही हैं. अगर आप मां बनने का सपना देख रही हैं तो आर्युवेद इसमें आपकी मदद कर सकता है. सिर्फ आपको धैर्य, सही मार्गदर्शन और बेहतर जीवनशैली अपनानी होगी.



