भारत सरकार के डाक विभाग ने एक बड़ा निर्णय लिया है, जिससे करोड़ों लोगों की पारंपरिक डाक भेजने की प्रक्रिया में बदलाव आएगा। 1 सितंबर 2025 से ‘रजिस्टर्ड पोस्ट’ (Registered Post) सेवा को स्थायी रूप से ‘स्पीड पोस्ट’ (Speed Post) में शामिल कर दिया जाएगा।
इसका मतलब यह है कि अब अलग से रजिस्टर्ड पोस्ट सेवा नहीं मिलेगी, बल्कि उसके फायदे स्पीड पोस्ट के माध्यम से ही उपलब्ध होंगे।
क्या है यह बदलाव?
डाक विभाग ने अपने आधिकारिक सर्कुलर में घोषणा की है कि घरेलू डाक सेवाओं में रजिस्टर्ड पोस्ट को पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाएगा और सभी ऐसे मेल अब स्पीड पोस्ट सेवा के अंतर्गत भेजे जाएंगे। यह फैसला 2 जुलाई 2025 को लिया गया था और इसे 1 सितंबर 2025 से लागू किया जाएगा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
इस कदम का उद्देश्य डाक सेवाओं को आधुनिक, प्रभावी और सरल बनाना है। विभाग का कहना है कि स्पीड पोस्ट पहले से ही ट्रैकिंग, तेज़ डिलीवरी और प्रूफ ऑफ डिलीवरी जैसी सुविधाएं देती है। ऐसे में दो अलग-अलग सेवाओं को चलाना व्यावहारिक नहीं रहा। तकनीकी रूप से दोनों सेवाएं काफी हद तक समान हो गई थीं, इसलिए रजिस्टर्ड पोस्ट को स्पीड पोस्ट में मर्ज कर देने का फैसला लिया गया।
ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा?
यह बदलाव आम लोगों और संस्थानों दोनों के लिए असर डाल सकता है। अब अगर कोई व्यक्ति किसी महत्वपूर्ण दस्तावेज़, कानूनी नोटिस, या किसी औपचारिक पत्र को सुरक्षित रूप से भेजना चाहता है, तो उसे स्पीड पोस्ट का उपयोग करना होगा।
हालांकि, इससे रजिस्टर्ड पोस्ट जैसी सुविधाएं बंद नहीं होंगी, बल्कि अब वे स्पीड पोस्ट में ही शामिल होंगी। जैसे – ट्रैकिंग सुविधा, डिलीवरी का प्रमाण, सिग्नेचर कन्फर्मेशन आदि। ग्राहक चाहें तो स्पीड पोस्ट के साथ “acknowledgement due” (AD) सुविधा भी जोड़ सकते हैं।
शुल्क और सेवाएं
स्पीड पोस्ट की दरें पहले से तय हैं:
- 50 ग्राम तक के पार्सल के लिए ₹35
- 500 ग्राम तक ₹90 तक
- डिलीवरी का समय 1 से 5 दिन तक, दूरी के आधार पर
यदि ग्राहक डिलीवरी का प्रमाण चाहते हैं, तो उन्हें इसके लिए अतिरिक्त ₹10 शुल्क देना होगा।
रजिस्टर्ड पोस्ट का इतिहास
रजिस्टर्ड पोस्ट की शुरुआत भारत में 1854 में हुई थी और यह वर्षों तक सबसे भरोसेमंद डाक सेवा रही है। खासकर सरकारी पत्राचार, अदालतों की नोटिस, और शैक्षणिक दस्तावेजों में इसका व्यापक उपयोग होता था। लेकिन डिजिटल युग के आगमन और स्पीड पोस्ट की बेहतर सेवाओं ने इसकी उपयोगिता कम कर दी।



