Vedant Samachar

रवींद्र जडेजा ने मैनचेस्टर की पिच को चूमा, मुश्किल हालातों में जिस पर मारा शतक, उसे ऐसे किया सलाम

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नई दिल्ली,28जुलाई : मुश्किल हालातों में जिस पर इंग्लैंड से लोहा लिया, शतक मारा, रिकॉर्ड बनाया, उस पिच को सलाम करना, उसे चूमना, उसकी मिट्टी का स्वाद लेना तो बनता है. और, भारतीय ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा ने मैनचेस्टर में कुछ ऐसा ही किया है. रवींद्र जडेजा ने ऐसा मैनचेस्टर टेस्ट को ड्रॉ कराने के बाद किया है. उन्होंने जिस अंदाज में मैनचेस्टर की पिच को चूमा है, उसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं.

रवींद्र जडेजा ने मैनचेस्टर की पिच को चूमा
मैनचेस्टर टेस्ट के ड्रॉ होने के बाद रवींद्र जडेजा ने इंग्लैंड के खिलाड़ियों और मैच के अंपायर्स से तो हाथ मिलाया ही. लेकिन, वो सब करने के अलावा वो पिच को छूकर उसे नमन करते. उसकी मिट्टी अपने हाथों में लेकर उसे अपने होठों से चूमते दिखे. सोशल मीडिया पर जडेजा की वही तस्वीरें अब छाई हुईं हैं.

जडेजा ने क्यों चूमी मैनचेस्टर की पिच?
अब सवाल है कि रवींद्र जडेजा ने पिच को चूमा क्यों? उसकी माटी का स्वाद चखा क्यों? तो इसका जवाब है मुश्किल हालातों में जमाया उनका शतक. मैनचेस्टर टेस्ट में जिन नाजुक हालातों में जडेजा का बल्ला चला, उनके लिए वैसा परफॉर्म करना उस वक्त की डिमांड थी. भारत को मैनचेस्टर टेस्ट बचाना था. अपनी हार को टालना था. कप्तान शुभमन गिल और उससे पहले केएल राहुल के प्रयासों ने लगभग आधा काम कर दिया था. लेकिन, बाकी बचा आधा काम करना अभी बाकी था.

पिच के सपोर्ट और अपनी मेहनत से जडेजा रहे कामयाब
मैनचेस्टर टेस्ट की दूसरी इनिंग में रवींद्र जडेजा की बल्लेबाजी की शुरुआत उन्हें मिले जीवनदान से हुई. जो रूट ने उनका कैच छोड़ा और उसके बाद उन्होंने तब तक पीछे मुड़कर नहीं देखा, जब तक मैच का रुख नहीं मोड़ दिया. रवींद्र जडेजा ने फिर इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर टेस्ट की दूसरी पारी में सैंकड़ा जड़ दिया. उन्होंने 185 गेंदों का सामना कर 107 रन बनाए, जो कि उनके टेस्ट करियर का 5वां शतक रहा. इस दौरान वाशिंगटन सुंदर के साथ हुई उनकी 334 गेंदों पर 203 रन की नाबाद और रिकॉर्ड साझेदारी भी अहम रही.

रवींद्र जडेजा ने इन्हीं वजहों से मैनचेस्टर की पिच को सलाम किया होगा, क्योंकि बिना पिच के सपोर्ट के तो कुछ भी मुमकिन नहीं था. जैसा की बेन स्टोक्स ने भी मैच के बाद कहा कि पिच में अनइवेन बाउंस था, मगर वो राइट हैंडर के लिए था, लेफ्ट हैंडर के लिए नहीं. भारत की खुशकिस्मती रही कि उसके लिए मैच ड्रॉ कराने के लिए लड़ रहे जडेजा और सुंदर दोनों लेफ्ट हैंडर थे.

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