मुंबई : पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल लोन और आसान क्रेडिट सुविधा के चलते लाखों लोगों ने बिना ज्यादा सोचे-समझे लोन ले लिया. लेकिन अब जब लोन चुकाने की बारी आई, तो बड़ी संख्या में लोग डिफॉल्टर हो रहे हैं. इसका सीधा असर NBFCs पर पड़ा है, जिससे NBFC सेक्टर का NPA आल टाइम हाई पर पहुंच गया है. दिसंबर तक के आंकड़ों के मुताबिक, NBFC को करीब 50,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.
समाज का बड़ा वर्ग लोन और कर्ज के मकड़जाल में फंसता जा रहा है. बैंकों से लोन नहीं पास हो पाता तो लोग NBFC की ओर रुख करते हैं. माइक्रो फाइनेंस कंपनियां कर्ज हासिल करने का सबसे बड़ा जरिया है. आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल लोन और आसान क्रेडिट सुविधा के चलते लाखों लोगों ने बिना ज्यादा सोचे-समझे लोन ले लिया. लेकिन अब जब लोन चुकाने की बारी आई, तो बड़ी संख्या में लोग डिफॉल्टर हो रहे हैं. इसका सीधा असर NBFCs पर पड़ा है, जिससे NBFC सेक्टर का NPA आल टाइम हाई पर पहुंच गया है. दिसंबर तक के आंकड़ों के मुताबिक, NBFC को करीब 50,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.
50000 करोड़ बढ़ा NPA
माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में दिसंबर तक NPA यानी नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स बढ़कर 50,000 करोड़ रुपये हो गया है. ये इसका रिकॉर्ड हाई लेवल है और अब तक जारी किए लोन का 13% है. NPA यानी जो लोग लोन लेकर भर नहीं पा रहे हैं. इसके अलावा कई ऐसे लोन भी हैं जो अब NPA बनने की कगार पर हैं. उनका आंकड़ा भी बढ़कर 3.2% हो गया है. एक साल पहले यह सिर्फ 1% और अब ये ढ़ाई गुना बढ़ गया है. इससे साफ पता चलता है कि लोगों के लोन लेकर भरने की क्षमता कमजोर हो रही है.
NPA का ये अनुमान क्रेडिट ब्यूरो Crif हाई मार्क के आंकड़ों पर आधारित है. ये ब्यूरो पूरा NPA आंकड़ा नहीं बताता है लेकिन अलग-अलग तरह के लोन के लिए रिस्क का आंकलन करता है और अनुमान बताता है. Crif के मुताबिक, 31 दिसंबर तक 91 से 180 दिनों तक बकाया लोन 3.3% थे. 180 दिनों से ज्यादा बकाया लोन 9.7% थे. मतलब, लोगों ने 90 दिनों के बाद भी लोन नहीं चुकाया है.
लोन डिफॉल्ट क्यों बढ़ रहा है?
आसान लोन अप्रूवल: कई फिनटेक कंपनियां और NBFCs बिना ज्यादा दस्तावेजों के तुरंत लोन दे रही थीं.
रोजगार में गिरावट: महामारी के बाद अब भी कई लोगों को स्थिर आय नहीं मिल रही, जिससे लोन चुकाना मुश्किल हो गया.
बढ़ती महंगाई: रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च बढ़ गया है, जिससे लोग EMI समय पर नहीं भर पा रहे.
मिसयूज़ ऑफ डिजिटल लोन: कई लोग बिना जरूरत के लोन ले रहे थे और उसका सही उपयोग नहीं कर पा रहे.
NBFCs पर इसका क्या असर हुआ?
NPA (Non-Performing Assets) बढ़े: डिफॉल्ट बढ़ने से NBFCs की बैलेंस शीट पर सीधा असर पड़ा.
फंडिंग में दिक्कत: कई NBFCs अब नए लोन देने में सतर्क हो गई हैं.
रिकवरी में परेशानी: WhatsApp और डिजिटल मैसेजिंग के जरिए रिकवरी की कोशिश हो रही है, लेकिन सफलता कम मिल रही है