आजकल लोग अपनी सेहत को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हो गए हैं. खासकर डायबिटीज जैसी बीमारियों को लेकर सतर्कता बढ़ी है. बहुत से लोग घर पर ही ब्लड शुगर लेवल मापने के लिए ग्लूकोज मीटर का इस्तेमाल करने लगे हैं, लेकिन क्या स्वस्थ लोगों को इसका इस्तेमाल करना चाहिए. इस रिसर्च में इसको लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. जिसे आपको जानना चाहिए.
आज भारत डायबिटीज रोग का हॉटस्पॉट सेंटर बनता जा रहा है. भारत में तेजी से डायबिटीज के मामले बढ़ते जा रहे हैं. 2024 के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भारत में डायबिटीज के 12 करोड़ से अधिक मरीज हैं. यानी देश की कुल व्यस्क आबादी का 13 फीसदी लोग डायबिटीज की बीमारी से जूझ रहे हैं. अनहेल्दी खानपान और खराब लाइफ स्टाइल के कारण यह बीमारी तेजी से बढ़ रही है. इसका नतीजा स्वस्थ लोगों पर भी दिख रहा है.
घर-घर में फैलने वाली यह बीमारी इतनी आम हो गई है कि अब स्वस्थ लोग शुगर नापने के लिए ग्लूकोज मीटर का इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन हाल ही में एक नई स्टडी में दावा किया गया है कि घर में यूज होने वाले डिजिटल ग्लूकोज मीटर कभी-कभी सही रीडिंग नहीं देते, जिससे स्वस्थ लोगों की चिंता बढ़ जाती है. रिसर्च में खुलासा हुआ है कि ग्लूकोज मीटर उतना सटीक रिजल्ट नहीं देता जितना लोग इसे मानते हैं.
क्या ब्लड शुगर लेवल चेक करने की जरूरत है?
नई स्टडी के मुताबिक, अगर आप पूरी तरह से स्वस्थ हैं और डायबिटीज जैसी कोई समस्या नहीं है तो बार-बार ब्लड शुगर चेक करने की जरूरत नहीं है. क्योंकि हमारा शरीर खुद ब्लड शुगर को बैलेंस करने में सक्षम होता. हालांकि, अगर आपको मोटापा, हाई बीपी या परिवार में डायबिटीज का इतिहास है तो आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
बाथ विश्वविद्यालय से द अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन में प्रकाशित नई स्टडी में बताया गया है कि स्वस्थ लोग शुगर नापने के लिए जिस ग्लूकोज मीटर को यूज कर रहे हैं. वह सही नहीं है. यह मीटर हमारे शरीर में ब्लड शुगर लेवल की मात्रा को सही रूप से नहीं बता पाता है. यह मीटर मूल रूप से डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए है. जो लोग डायबिटीज से परेशान हैं वह इस मीटर का यूज कर सकते हैं कि उनका शुगर लेवल कितना है, लेकिन जो लोग स्वस्थ हैं और वो इसका इस्तेमाल करना चाहते हैं उनके लिए यह सटीक रिजल्ट नहीं दे पाता है. जिससे स्वस्थ लोग भी घबरा जाते हैं.
मीटर रीडिंग के आधार पर डाइट में बदलाव करना खतरनाक
रिसर्च में खुलासा हुआ कि कई बार स्वस्थ लोगों ने ग्लूकोज मीटर का इस्तेमाल किया, जिसमें उनका ब्लड शुगर लेवल अधिक दिखाया गया. इससे डर कर लोगों ने अपने आहार में बदलाव किया, जिससे उनके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ा. लोगों ने अपनी डाइट को बदला तो इससे उनके शरीर में पोषण कम हो गया और कुछ मामलों में वजन भी तय मानक से कम हुआ.
क्या है स्टडी का मकसद?
इस स्टडी का मकसद ग्लूकोज मीटर की सटीकता का आकलन करना था. जिसमें यह खुलासा हुआ कि ग्लूकोज मीटर हमेशा शरीर में ब्लड शुगर लेवल की सही जानकारी नहीं देता है . ऐसे में स्वस्थ लोगों को ग्लूकोज मीटर का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए. इसके कई नुकसान हो सकते हैं. स्वस्थ लोगों को शुगर लेवल की जानकारी खुद से नहीं लेनी चाहिए. क्योंकि स्वस्थ लोगों के ब्लड में ग्लूकोज का स्तर सामान्य रहता है. ग्लूकोज मीटर इस्तेमाल करने और उसके रिजल्ट देखने से लोग अनावश्यक चिंतित हो जाते हैं.