Vedant Samachar

स्ट्रेस के कारण DNA भी Short हो सकता है, ये उम्र से पहले बुढ़ापा लाता है: हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की रिसर्च का दावा

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हॉर्वर्ड मेडिकल स्कूल की रिसर्च में पाया गया कि क्रोनिक स्ट्रेस शरीर में मौजूद DNA के सिरों पर मौजूद Telomeres को छोटा कर देता है.Telomeres, DNA के छोरों की सुरक्षा करते हैं जैसे जूते के लेस के सिरों पर प्लास्टिक कवर. जैसे-जैसे ये टेलोमीयर्स छोटे होते हैं, कोशिकाएं जल्दी बूढ़ी होती हैं और शरीर में एजिंग शुरू हो जाती है

क्या आप जानते हैं कि ज्यादा मानसिक तनाव सिर्फ मूड और नींद पर ही असर नहीं डालता, बल्कि आपके DNA को भी छोटा कर सकता है? हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की एक रिसर्च के अनुसार, लंबे समय तक बना रहने वाला स्ट्रेस (chronic stress) शरीर की कोशिकाओं में मौजूद टिलोमेर (Telomere) को छोटा कर देता है, जिससे व्यक्ति के अंदर उम्र से पहले बुढ़ापा आने के संकेत दिखाई देने लगते हैं.

बॉडी एजिंग क्या होता है?
DNA के सिरों पर टिलोमेर नामक सुरक्षा कवच होता है जो कोशिकाओं/Cells को स्थिर और सुरक्षित रखने का काम करता है. लेकिन हर बार जब हमारी कोशिकाएं टूटती हैं, तो ये टिलोमेर थोड़े-थोड़े करके छोटे होते जाते हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि जब टिलोमेर बहुत छोटे हो जाते हैं, तो cells मरने लगती हैं या बूढ़ी हो जाती हैं. इसी को बॉडी एजिंग कहा जाता है.

Aging का सबसे बड़ा कारण है Stress

रिसर्च के मुताबिक, जब इंसान लंबे समय तक मानसिक तनाव में रहता है—जैसे कि पारिवारिक समस्याएं, आर्थिक तनाव, परीक्षा का दबाव, या वर्क-लाइफ बैलेंस की मुश्किलें—तो यह स्थिति कोर्टिसोल जैसे तनाव हार्मोन को बढ़ा देती है. इससे शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन (inflammation) बढ़ती है, जो DNA को नुकसान पहुंचाती है. इस वजह से टिलोमेर की लंबाई और तेजी से घटती है.

बच्चों और युवाओं में खतरा अधिक
इसका सबसे बड़ा असर उन बच्चों और युवाओं पर देखा गया है, जो बचपन से ही तनावपूर्ण माहौल में रहते हैं. रिसर्च में यह भी बताया गया है कि जिन लोगों को बचपन में भावनात्मक या सामाजिक तनाव का सामना करना पड़ा, या जिन्हें Emotional support नहीं मिला, उनके टिलोमेर की लंबाई सामान्य से कम पाई गई. यहां तक कि मेडिकल इंटर्नशिप में काम कर रहे युवा डॉक्टरों के DNA में भी एक साल के अंदर टिलोमेर में भारी गिरावट देखी गई.

विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ बायोलॉजिकल बदलाव नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी सेहत पर पड़ता है. जब कोशिकाएं जल्दी बूढ़ी होने लगती हैं, तो व्यक्ति में जल्दी थकावट, झुर्रियां, कमजोर इम्यून सिस्टम, और बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है.

क्या है Anti-Aging के तरीके
इस रिसर्च से यह भी साफ होता है कि तनाव को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है. मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना, रोज़ाना व्यायाम, ध्यान (meditation), योग, और भरपूर नींद जैसे उपाय ना सिर्फ मन को शांत रखते हैं, बल्कि शरीर को अंदर से जवान और सेहतमंद बनाए रखने में मदद करते हैं.

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