जांजगीर चांपा, 27 जून (वेदांत समाचार) I जिले के बलौदा विकासखंड के ग्राम महुवा में स्व-सहायता समूहों ने रेशम उत्पादन में नई पहचान बनाई है। रेशम विभाग और मनरेगा की मदद से यह सफलता मिली है।
समूह की महिलाएं और पुरुष कृमिपालन यानी रेशम के कीड़ों का पालन कर रहे हैं। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। यह काम अन्य ग्रामीणों के लिए प्रेरणा बन गया है। इस पहल से पर्यावरण को फायदा हुआ है। स्थानीय मजदूरों को गांव में ही काम मिला है। मनरेगा से 9,884 मानव दिवस का रोजगार सृजन हुआ है।

अर्जुन के पेड़ों पर कृमिपालन कर रही महिलाएं
साल में 2 बार लेती है फसल
जनपद पंचायत बलौदा की डीईओ नीतू गुप्ता ने बताया कि महूदा स्वावलंबन स्व-सहायता समूह की शकुंतला यादव और रामनी साहू अर्जुन के पेड़ों पर कृमिपालन कर रही हैं। वे साल में दो बार कोसा की फसल लेती हैं।
स्थानीय बाजार में कोसा लोकप्रिय
इससे समूह के हर सदस्य को 50 से 60 हजार रुपए सालाना की आय होती है। महिलाओं ने प्रशिक्षण लेकर वैज्ञानिक तरीके से कोसा पालन शुरू किया है। अच्छी क्वालिटी और लगातार मेहनत से स्थानीय बाजार में उनका कोसा लोकप्रिय हो गया है।

जांजगीर चांपा में हो रहा रेशम उत्पादन
मनरेगा के साथ मिलकर कर रहे काम
कोसा उत्पादन से महिलाएं आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत हुई हैं। उनमें आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास बढ़ा है। रेशम विभाग और मनरेगा के साथ मिलकर किए गए अर्जुन पौधरोपण ने पर्यावरण को बेहतर बनाया है। साथ ही ग्रामीण आजीविका को नई दिशा दी है।



