बालोद,21जून 2025(वेदांत समाचार) । छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश एवं दुनिया में सनातन संस्कृति एवं आस्था के प्रमुख केन्द्र के रूप में स्थापित बालोद जिले के डौण्डीलोहारा विकासखण्ड के सुदूर वनांचल में स्थित पाटेश्वर आश्रम में भव्य एवं विशाल कौशल्या धाम बनाने का परिकल्पना शीघ्र साकार होने वाला है। पाटेश्वर सेवा संस्थान के संचालक राम बालकदास महात्यागी ने बताया कि कौशल्या धाम का निर्माण कार्य अंतिम चरण पर है। उन्होंने कहा कि माता कौशल्या धाम के निर्माण कार्य पूरा हो जाने के बाद 2026 में इसका विधिवत लोकार्पण किया जाएगा।
संत राम बालकदास ने बताया कि समाज के सभी वर्गों के सहयोग से निर्मित की जा रही भव्य एवं विशाल कौशल्या माता धाम पूरे देश और दुनिया का एक मात्र कौशल्या धाम होगा। उन्होंने कहा कि पाटेश्वर आश्रम परिसर के लगभग 04 एकड़ भूमि में निर्माणाधीन तीन मंजिला कौशल्या धाम मंदिर के द्वितीय तल पर भगवान रामलला को अपनी गोद में ली हुई 07 फीट का माँ कौशल्या की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह प्रतिमा पूरे देश और दुनिया में अपने तरह की पहली प्रतिमा होगी। कौशल्या धाम के पहले तल में शिव लिंग स्थापित की जाएगी। इसके साथ ही तीसरे तल पर पंचमुँखी हनुमान की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
संत राम बालकदास ने बताया कि तीनों प्रतिमा के निर्माण कार्य अंतिम चरण पर है। इसके अलावा इस भव्य एवं विशाल तीन मंजिला कौशल्या धाम में अग्नि, वायु, सहस्त्रबाहु, कबीर, संत रविदास, झुलेलाल, कर्मा माता, परमेश्वरी माता आदि सभी जाति एवं सम्प्रदायों के कुल 108 आराध्य देवी-देवताओं तथा महापुरूषों की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। इसके फलस्वरूप यह कौशल्या धाम सभी धर्मों और जातियों के आस्था एवं सर्व धर्म संभाव के केन्द्र के रूप मंे स्थापित होगा। बालोद जिले के डौण्डीलोहारा विकासखण्ड के आदिवासी बहुल बड़ा जुंगेरा ग्राम घनघोर जंगल और पहाड़ों के बीच प्रकृति के मनोरम वादियों में स्थित पाटेश्वर आश्रम में माता कौशल्या धाम के निर्माण कार्य पूरा हो जाने के पश्चात् यह धाम श्रद्धालुओं और दर्शनार्थियों के लिए आस्था एवं आकर्षण का प्रमुख केन्द्र के रूप में स्थापित होगा।
उल्लेखनीय है कि लगभग 12 एकड़ के विशाल क्षेत्र में स्थित पाटेश्वर धाम छत्तीसगढ़ राज्य सहित पूरे देश में सनातन संस्कृति के लोगों का प्रमुख आस्था का केन्द्र है। यहाँ पर माघी पूर्णिमा, गुरू पूर्णिमा के अवसर पर विशाल मेला के आयोजन के अलावा प्रतिदिन श्रद्धालुओं और दर्शानार्थी पाटेश्वर धाम में पहुँचते है। इस पाटेश्वर धाम को जामड़ीपाट के नाम से भी जाना जाता है। इसका ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व भी है। यह स्थल प्रारंभ से ही आदिवासी समाज तथा अंचल के लोगों के लिए आस्था का केन्द्र रहा है। इस आश्रम परिसर के ऊपरी पहाड़ी में 416 सीढ़ी चढ़ने के पश्चात् अंचल के 12 गांव तथा आदिवासी समाज के लोगों का आराध्य देव स्थापित है। यहाँ पर विभिन्न पर्वों के अवसर पर आदिवासी समाज एवं अंचल के लोगों के द्वारा पूजा-अर्चना किया जाता है।



