जेलपारा और प्रगति नगर में बुलडोजर चला, आक्रोश चरम पर
रायगढ़ | 14 जून 2025 — रायगढ़ शहर के जेलपारा और प्रगति नगर क्षेत्र में प्रस्तावित मरीन ड्राइव परियोजना को लेकर जनआक्रोश अब विस्फोटक रूप ले चुका है। शनिवार सुबह नगर निगम की टीम भारी पुलिस बल और बुलडोजर के साथ क्षेत्र में पहुँची और मकानों को तोड़ने की कार्रवाई शुरू कर दी। इस दौरान रायगढ़ के पुलिस अधीक्षक सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।
“विकास” के नाम पर उजाड़े गए आशियाने
प्रशासन इस परियोजना को शहर के ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए महत्वपूर्ण बता रहा है। योजना के तहत नया शनि मंदिर से लेकर छठ पूजा स्थल तक मरीन ड्राइव के विस्तार हेतु सड़क निर्माण किया जाना है। इसके दायरे में जेलपारा और प्रगति नगर के करीब 100 से अधिक मकान आ रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि इन मकानों को पूर्व सूचना के आधार पर हटाया जा रहा है, लेकिन स्थानीय निवासी इस दावे को सिरे से खारिज कर रहे हैं।

“20 साल से रह रहे हैं, अब अचानक उजाड़ा जा रहा है”
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि उन्हें कोई वैकल्पिक व्यवस्था, पुनर्वास योजना या समयबद्ध नोटिस नहीं दिया गया। एक महिला निवासिनी ने रोते हुए कहा —
“हम 20-25 साल से यहाँ रह रहे हैं। मरीन ड्राइव के नाम पर हमारे घरों को तोड़ा जा रहा है। किसी ने नहीं पूछा कि हम जाएँगे कहाँ।”
अब तक 36 से अधिक मकान ध्वस्त किए जा चुके हैं और कार्रवाई जारी है।
महिला कांग्रेस का मोर्चा, नारेबाज़ी और विरोध
कार्रवाई के खिलाफ स्थानीय महिलाओं का आक्रोश फूट पड़ा। महिला कांग्रेस की कार्यकर्ताओं ने मौके पर पहुँचकर बुलडोजर के सामने खड़े होकर विरोध प्रदर्शन किया।
“पहले पुनर्वास, फिर विकास!”,
“हमारे घर नहीं उजड़ने देंगे!”
जैसे नारों के साथ सैकड़ों महिलाएं सड़कों पर उतर आईं। तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए क्षेत्र को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है।
जनता की गुहार, नेताओं की चुप्पी

पीड़ितों का कहना है कि वे वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी और रायगढ़ विधायक से गुहार लगा चुके हैं।
“हमने जिनको वोट देकर जिताया, आज वो हमारी चीख भी नहीं सुन रहे। पुलिस ने हमें खींचकर घरों से बाहर निकाला और नगर निगम ने बुलडोजर चला दिया।”
— एक वृद्ध पीड़िता ने रोते हुए कहा।
प्रशासनिक संवेदनहीनता पर सवाल
रायगढ़ SDM महेश शर्मा लोगों को समझाने की कोशिश करते रहे, पर जनता आश्वासनों से संतुष्ट नहीं है।
प्रशासन की इस कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं —
क्यों नहीं दी गई पुनर्वास की ठोस नीति?
क्यों नहीं मिला सामान निकालने का समय?
क्या विकास अब सीधे इंसानों पर चढ़कर आगे बढ़ेगा?
संकट की दस्तक : क्या आंदोलन होगा उग्र?
वर्तमान में क्षेत्र में भारी तनाव व्याप्त है। जनप्रतिनिधियों की चुप्पी, प्रशासन की हठधर्मिता और नगर निगम की कठोरता के चलते हालात बिगड़ते जा रहे हैं। यदि शीघ्र कोई मानवीय समाधान नहीं निकला गया, तो यह आंदोलन विधानसभा तक गूंज सकता है।



