राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की ओर से जारी कंप्रहेंसिव मॉडुलर सर्वेः टेलीकॉम के आंकड़ों से पता चलता है कि महिलाओं के पास मोबाइल फोन की कमी है। आंकड़ों के अनुसार, 10 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में 15 साल व इससे ऊपर की उम्र की महिलाओं के पास मोबाइल फोन 56.2 प्रतिशत के राष्ट्रीय औसत से कम है ।
आंकड़ों से पता चलता है कि छत्तीसगढ़ (39 प्रतिशत), त्रिपुरा (40.4 प्रतिशत) और मध्य प्रदेश (42.4 प्रतिशत) पिछड़े हुए हैं। इसके विपरीत, गोवा और लद्दाख में करीब 92 प्रतिशत महिलाओं के पास मोबाइल फोन है। इसके बाद मिजोरम (88.5 प्रतिशत), केरल (85 प्रतिशत) और पुदुच्चेरी (83 प्रतिशत) का स्थान है । एनएसओ के सर्वे में मोबाइल फोन के मालिकाना को व्यक्तिगत उपयोग के लिए सक्रिय सिम कार्ड युक्त डिवाइस के रूप में परिभाषित किया गया है। इसमें नियोक्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए फोन और उपयोगकर्ता के नाम पर पंजीकृत नहीं किए गए फोन भी शामिल हैं ।
आंकड़ों से पता चलता है कि शहरी इलाकों में करीब 72 प्रतिशत महिलाओं के पास मोबाइल है, जबकि ग्रामीण इलाकों में सिर्फ 48 प्रतिशत महिलाओं के पास मोबाइल है। यह आंकड़े महिलाओं के बीच मोबाइल फोन की पहुंच में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े अंतर को दर्शाते हैं । इस सर्वे से पता चलता है कि महिलाओं के बीच मोबाइल फोन की पहुंच में सुधार की आवश्यकता है। यह न केवल महिलाओं को सशक्त बनाने में मदद करेगा, बल्कि उन्हें डिजिटल दुनिया से जुड़ने और अपने जीवन में सुधार करने के अवसर भी प्रदान करेगा ।



