अपामार्ग या चिरचिटा एक बहुगुणी पौधा है, जो आयुर्वेद में कई रोगों के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है। इसकी दो प्रमुख प्रजातियां हैं – सफेद अपामार्ग और लाल अपामार्ग। यह पौधा भारत के सूखे और ग्रामीण क्षेत्रों में पाया जाता है और इसकी ऊंचाई 60 से 120 सेमी तक होती है।
अपामार्ग के आयुर्वेदिक गुण:
- पाचनवर्धक
- दर्दनाशक
- विषनाशक
- कृमिनाशक
- रक्तशोधक
- बुखार और श्वास रोग नाशक
अपामार्ग के प्रमुख लाभ:
- गठिया: पत्तों को पीसकर गर्म करके लगाने से सूजन और दर्द में राहत मिलती है।
- पित्त की पथरी: जड़ का काढ़ा काली मिर्च के साथ लेने से लाभ होता है।
- मोटापा: इसके बीज से बनी खीर या भात वजन कम करने में सहायक है।
- बवासीर: पत्ते और कालीमिर्च का मिश्रण तथा जड़ का प्रयोग खूनी व बादी बवासीर में उपयोगी है।
- गंजापन: पत्तों को तेल में जलाकर तैयार लेप लगाने से बाल उग सकते हैं।
- दांतदर्द/कैविटी: पत्तों के रस को दांतों में लगाने से दर्द और सड़न में लाभ होता है।
- अस्थमा: इसकी जड़ का चूर्ण शहद के साथ लेने से श्वास रोग में विशेष लाभ होता है।
अपामार्ग का उपयोग करने से पहले किसी योग्य वैद्य से परामर्श अवश्य लें। यह पौधा सस्ता, सुलभ और अत्यंत उपयोगी है, लेकिन इसके सही उपयोग और मात्रा का ध्यान रखना आवश्यक है ¹।



