तेहरान/वॉशिंगटन , 19 जुलाई। अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। अमेरिका ने लगातार आठवीं रात भी ईरान पर हवाई हमले किए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने खुद इन हमलों को मंजूरी दी थी और यह कार्रवाई जॉर्डन में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत के जवाब में की गई है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया कि इस बार हमलों का मुख्य निशाना ईरान के सैन्य ठिकाने, हथियारों के भंडार और लॉजिस्टिक्स सेंटर रहे। अमेरिकी सेना के मुताबिक, इन हमलों का उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को खतरा पैदा करने की ईरान की क्षमता को कमजोर करना है।
हालांकि, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में पुलों और डिसैलिनेशन प्लांट पर भी हमले की बात कही गई है, लेकिन CENTCOM ने इसकी पुष्टि नहीं की है। जंग में में दो और सैनिकों की मौत जान गंवाने वाले अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है।
अमेरिका ने विदेशों में रह रहे नागरिकों से सतर्क रहने को कहा
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने दुनियाभर में रह रहे और यात्रा कर रहे अमेरिकी नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी कर अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा है। मंत्रालय ने मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव और हालात के अचानक बिगड़ने की आशंका जताई है।
यह एडवाइजरी ईरान पर ताजा अमेरिकी हवाई हमलों से पहले जारी की गई थी। इसके बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। इस संघर्ष का असर अमेरिका पर भी दिखाई दे रहा है। ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ अमेरिकी सैनिकों की मौतों की संख्या भी बढ़ी है।
ईरान का कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमला
ईरानी सेना ने दावा किया है कि उसने जवाबी कार्रवाई में कुवैत के कैंप अल-उदेरी स्थित अमेरिकी सेना के गोला-बारूद डिपो और अली अल-सलेम एयर बेस पर मौजूद पैट्रियट रडार व एयर सर्विलांस रडार को ड्रोन से निशाना बनाया। ईरान के इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
केश्म द्वीप के पास अमेरिकी हमला
ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने क़ेश्म द्वीप के पास एक स्थान पर हमला किया। एजेंसी ने दावा किया कि इस हमले में कोई नागरिक हताहत नहीं हुआ और न ही किसी रिहायशी या व्यावसायिक ढांचे को नुकसान पहुंचा।

