नए शिक्षा सत्र में बिलासपुर यातायात पुलिस सख्त, स्कूलों को सुप्रीम कोर्ट के 18 सुरक्षा नियमों का पालन करने के निर्देश - vedantsamachar.in

नए शिक्षा सत्र में बिलासपुर यातायात पुलिस सख्त, स्कूलों को सुप्रीम कोर्ट के 18 सुरक्षा नियमों का पालन करने के निर्देश

बिलासपुर, 6 जुलाई 2026 (वेदांत समाचार)। नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत के साथ ही बिलासपुर यातायात पुलिस ने स्कूली बच्चों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए जिले के सभी स्कूलों, स्कूल बस संचालकों और अभिभावकों के लिए विस्तृत सुरक्षा दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यातायात पुलिस ने स्पष्ट किया है कि स्कूली बच्चों के परिवहन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी सुरक्षा मानकों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करना सभी संबंधित पक्षों की जिम्मेदारी होगी।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं पुलिस उप महानिरीक्षक रजनेश सिंह के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (यातायात) रामगोपाल करियारे के पर्यवेक्षण में जारी अपील में कहा गया है कि बिलासपुर जिले में वर्तमान में 400 से अधिक स्कूल वाहन संचालित हो रहे हैं। ऐसे में विद्यार्थियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी स्कूल प्रबंधन को सुप्रीम कोर्ट की 18 सूत्रीय मार्गदर्शिका का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

यातायात पुलिस ने स्कूल प्रबंधन को बताया कि प्रत्येक स्कूल बस का रंग पीला होना चाहिए तथा बस के चारों ओर स्कूल का नाम और संपर्क नंबर स्पष्ट रूप से अंकित होना अनिवार्य है। बस के आगे और पीछे “स्कूल बस” लिखा होना चाहिए। यदि वाहन किसी निजी एजेंसी के माध्यम से अनुबंधित है तो उस पर “ऑन स्कूल ड्यूटी” अंकित होना आवश्यक होगा।

सुरक्षा मानकों के तहत सभी स्कूल बसों में मजबूत क्षैतिज ग्रिल लगी खिड़कियां, विद्यार्थियों के बैग रखने के लिए सुरक्षित स्थान, मजबूत लॉकिंग सिस्टम वाले दरवाजे, कार्यशील अग्निशमन यंत्र, फर्स्ट एड बॉक्स और निर्धारित गति सीमा बनाए रखने के लिए स्पीड गवर्नर अनिवार्य रूप से लगाए जाने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अलावा प्रत्येक स्कूल बस में आपातकालीन निकास की व्यवस्था, जीपीएस आधारित व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम, कार्यशील सीसीटीवी कैमरे और पैनिक बटन भी अनिवार्य किए गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

यातायात पुलिस ने स्कूल बस चालकों और परिचालकों के लिए भी कड़े नियम निर्धारित किए हैं। निर्देशों के अनुसार बस चालक के पास भारी वाहन चलाने का कम से कम पांच वर्ष का अनुभव होना चाहिए। चालक के खिलाफ गंभीर यातायात उल्लंघन या आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं होना चाहिए। प्रत्येक स्कूल बस में बच्चों की सुरक्षा के लिए प्रशिक्षित परिचालक अथवा महिला अटेंडेंट की उपस्थिति अनिवार्य होगी।

स्कूल प्रबंधन को यह भी निर्देशित किया गया है कि किसी भी बस में उसकी निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को नहीं बैठाया जाए। सभी वाहन चालकों और परिचालकों का पुलिस सत्यापन तथा नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाए। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन की निगरानी के लिए प्रत्येक विद्यालय में एक मॉनिटरिंग समिति का गठन भी किया जाए।

यातायात पुलिस ने कहा कि स्कूल वाहनों के सभी आवश्यक दस्तावेज जैसे फिटनेस सर्टिफिकेट, बीमा, प्रदूषण प्रमाणपत्र और अन्य वैधानिक दस्तावेज समय-समय पर अपडेट होना अनिवार्य है। बिना फिटनेस या आवश्यक दस्तावेजों के कोई भी वाहन बच्चों के परिवहन में उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।

पुलिस ने स्पष्ट किया कि खुले, असुरक्षित अथवा मालवाहक वाहनों में बच्चों का परिवहन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। साथ ही नाबालिग विद्यार्थियों द्वारा दोपहिया या अन्य वाहन चलाकर स्कूल आने पर भी रोक लगाने की अपील की गई है। विशेष रूप से छात्राओं के परिवहन वाले वाहनों में महिला परिचारिका की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

यातायात पुलिस ने स्कूल प्रबंधन को यह भी निर्देश दिया है कि यदि कोई स्कूल बस चालक तेज गति, लापरवाही या यातायात नियमों का उल्लंघन करते हुए वाहन चलाता है तो उसकी शिकायत के लिए बस पर स्पष्ट रूप से शिकायत संबंधी मोबाइल नंबर अंकित किया जाए, ताकि अभिभावक और नागरिक तत्काल शिकायत दर्ज करा सकें। इसके अलावा शराब या अन्य नशे के आदी चालकों को किसी भी परिस्थिति में स्कूल वाहन संचालन की जिम्मेदारी नहीं दी जाए।

बिलासपुर यातायात पुलिस ने स्कूल प्रबंधन, बस संचालकों, अभिभावकों और आम नागरिकों से अपील की है कि बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी यातायात नियमों और सुरक्षा मानकों का पूरी गंभीरता एवं जिम्मेदारी के साथ पालन करें। पुलिस का कहना है कि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। सभी के सहयोग से ही स्कूली बच्चों को सुरक्षित और दुर्घटनामुक्त परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराई जा सकती है।