श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ में रूखमणी विवाह की कथा में झूमे भक्त

धमतरी ,07 जनवरी  ग्राम मोखा (मड़ईभाठा) में मातृशक्ति महिला ग्राम संगठन एवं समस्त ग्रामवासियों के सहयोग से 1 जनवरी से 9 जनवरी तक श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह कथा का आयोजन किया गया है। भागवत कथा में कथा वाचक राजू पाठक द्वारा श्रवण कराया जा रहा है।  कथा का रसपान करने श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। कथा दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक जारी है। कार्यक्रम के तहत 1 जनवरी को श्री भागवत कथा स्थापना किया गया। 2 जनवरी को परीक्षित, जनवरी को शंकर विवाह, धु्रव चरित्र, 4 जनवरी को जड़ भरत, प्रहलाद चरित्र, 5 जनवरी को समुद्र मंथन, कृष्ण जन्म, 6 जनवरी को कृष्ण लीला का कथावाचन हुआ।

श्रीमद् भागवत कथा में 7 जनवरी  को पं. राजू पाठक ने रूखमणी विवाह का कथा प्रसंग सुनाया। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह को एकाग्रता से सुना। श्रीकृष्ण-रुक्मणि का वेश धारण कर बाल कलाकार बड़ी संख्या में आए जिनका श्रद्धालुओं ने स्वागत किया। श्रद्धालुओं ने विवाह के मंगल गीत गाए। कथा प्रसंग में पं. राजू पाठक ने कहा कि रुक्मणी विदर्भ देश के राजा भीष्म की पुत्री और साक्षात लक्ष्मी जी का अवतार थी। रुक्मणी ने जब देवर्षि नारद के मुख से श्रीकृष्ण के रूप, सौंदर्य एवं गुणों की प्रशंसा सुनी तो उसने मन ही मन श्रीकृष्ण से विवाह करने का निश्चय किया। 

रुक्मणी का बड़ा भाई रुक्मी श्रीकृष्ण से शत्रुता रखता था और अपनी बहन का विवाह चेदिनरेश राजा दमघोष के पुत्र शिशुपाल से कराना चाहता था। रुक्मणी को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने एक ब्राह्मण संदेशवाहक द्वारा श्रीकृष्ण के पास अपना परिणय संदेश भिजवाया। तब श्रीकृष्ण विदर्भ देश की नगरी कुंडीनपुर पहुंचे और वहां बारात लेकर आए शिशुपाल व उसके मित्र राजाओं शाल्व, जरासंध, दंतवक्त्र, विदु रथ और पौंडरक को युद्ध में परास्त करके रुक्मणी का उनकी इच्छा से हरण कर लाए। वे द्वारिकापुरी आ ही रहे थे कि उनका मार्ग रुक्मी ने रोक लिया और कृष्ण को युद्ध के लिए ललकारा। तब युद्ध में श्रीकृष्ण व बलराम ने रुक्मी को पराजित करके दंडित किया। तत्पश्चात श्रीकृष्ण ने द्वारिका में अपने संबंधियों के समक्ष रुक्मणी से विवाह किया। इस अवसर पर मातृशक्ति महिला ग्राम संगठन की सभी महिलाएं, ग्रामवासी श्रद्धालु मौजूद रहे।