युद्धविराम की घोषणा के बाद भी पश्चिम एशियाई देशों में गूंज रहे मिसाइल के अलर्ट, तनाव बरकरार

दुबई, 08 अप्रैल। पश्चिम एशिया में एक महीने से ज्यादा समय से जारी संघर्ष के बीच राहत भरी खबर सामने आई है। महीनों से जारी युद्ध पर आखिरकार अस्थायी विराम लग गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल के बाद ईरान ने भी दो हफ्ते के सीजफायर (युद्धविराम) पर अपनी मुहर लगा दी है।

युद्धविराम के बावजूद गूंजे सायरन
ईरान और अमेरिका ने दो हफ्ते के युद्धविराम पर सहमति के बावजूद बुधवार सुबह इस्राइल और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में मिसाइल अलर्ट के सायरन गूंजे। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इन दोनों देशों में किन ठिकानों को निशाना बनाया गया है। युद्ध के दौरान इन देशों ने सबसे अधिक मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना किया है।


इन देशों पर भी हुआ हमला
मिसाइल अलर्ट का यह सिलसिला केवल यहीं तक सीमित नहीं रहा। बुधवार सुबह सऊदी अरब, बहरीन और कुवैत में भी अलर्ट जारी रहे। इन घटनाओं ने कूटनीतिक स्तर पर चल रही शांति की कोशिशों के बीच भ्रम पैदा कर दिया है। पूरे युद्ध के दौरान ईरान की अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड ने सभी फैसलों में मुख्य भूमिका निभाई है। वहां के राजनीतिक नेतृत्व को किनारे रखकर अलग-अलग कमांडरों ने अपनी मर्जी से हमले किए हैं।


इस्लामाबाद में बातचीत की तैयारी के बीच बड़ा सवाल है कि क्या सैन्य कमांडरों ने युद्धविराम की बात मान ली है? हालांकि मध्य पूर्व के युद्धों में अक्सर देखा गया है कि लड़ाके आखिरी समय में हमले तेज कर देते हैं। वे ऐसा इसलिए करते हैं ताकि अपनी जनता के सामने जीत का दावा कर सकें। फिलहाल इन हमलों ने समझौते के भविष्य पर चिंता बढ़ा दी है।