Vedant Samachar

दुनिया पर फिर छाया ‘लॉकडाउन’ का साया? ‘ऊर्जा संकट’ के लिए कई देशों ने शुरू कर दी तैयारी

Vedant Samachar
2 Min Read

मिडिल ईस्ट में ईरान के साथ चल रहे तनाव ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लगभग बंद कर दिया है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है. इस वजह से कच्चे तेल की कीमतें 112 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जबकि अमेरिका में गैसोलीन 5 डॉलर प्रति गैलन पर है. ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से खाद्य वस्तुओं समेत हर चीज महंगी हो रही है और खाद्य सुरक्षा पर भी संकट मंडरा रहा है.

दुनिया भर में एयरलाइंस उड़ानें कम कर रही हैं. यूनाइटेड एयरलाइंस ने ही इस हफ्ते 5 प्रतिशत उड़ानें काट दीं, जबकि अन्य कंपनियां भी ऐसा कर रही हैं. जापान और दक्षिण कोरिया में ईंधन राशनिंग शुरू हो चुकी है, वहीं बांग्लादेश, फिलीपींस और श्रीलंका में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग रही हैं. भारत जैसे देश जहां 80 प्रतिशत तेल इसी मार्ग से आता है, वहां महंगाई का दबाव तेजी से बढ़ रहा है.

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने ‘Sheltering from Oil Shocks’ नामक 10-सूत्री योजना जारी की है, जो मांग घटाने पर केंद्रित है. इसमें वाहनों के लिए लाइसेंस प्लेट आधारित दिनों का निर्धारण, हाईवे पर स्पीड लिमिट, हवाई यात्रा में कटौती, घर से काम और इलेक्ट्रिक चूल्हों का उपयोग जैसे कदम शामिल हैं. एजेंसी का कहना है कि कोविड जैसी ये रणनीतियां ऊर्जा संकट से निपटने में कारगर साबित होंगी, हालांकि असर लॉकडाउन सा ही होगा.

ऑस्ट्रेलिया जैसी सरकारें गैर-जरूरी यात्राओं पर रोक लगा रही हैं, जो कोविड वाली भाषा की याद दिलाती है. अगर संकट लंबा खिंचा तो डिजिटल परमिट सिस्टम तक बात पहुंच सकती है, जहां यात्रा व उपभोग नियंत्रित हों. विशेषज्ञों का मानना है कि यह ऊर्जा सुरक्षा का नाम होगा, लेकिन आमजन की आजादी पर असर पड़ेगा. भारत को वैकल्पिक स्रोतों पर जोर देकर तैयारी तेज करनी होगी.

Share This Article