रायगढ़, 16 मार्च (वेदांत समाचार) : रायगढ़ जिला में एक महिला को CSR फंड से अनुदान राशि दिलाने के नाम पर उसके बैंक खाते का इस्तेमाल किया गया। जिससे करोड़ों का संदिग्ध ट्रांजेक्शन किया गया। जब इसकी जानकारी महिला को लगी, तो उसने थाना में सूचना दी। पुलिस ने मामले से जुड़े 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना साइबर थाना क्षेत्र का है। मिली जानकारी के मुताबिक इंदिरानगर में रहने वाली महिला आयशा परवीन, जो आयुष शिक्षा समिति NGO से जुड़ी सामाजिक कार्यकर्ता है।
उसने 12 मार्च को साइबर थाना में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताई कि दिसंबर 2025 में उसके भांजे ने उसकी पहचान अभय यादव और विजय चंद्रा से कराई थी। विजय चंद्रा ने बताया कि एक कंपनी CSR मद से सामाजिक कार्यों के लिए अनुदान देना चाहती है। ऐसे में आयशा परविन की संस्था के पंजीयन से संबंधित दस्तावेज लिए गए। कुछ दिनों बाद विजय चंद्रा ने अपने साथी अजय साहू और सचिन चौहान से महिला का संपर्क कराया। आरोपियों ने महिला को भरोसे में लिया और आयशा ने अपने संस्थान के नाम से एक्सिस बैंक में खाता खुलवाया।
महिला और उसके पति को गुवाहटी बुलाया गया
खाता खुलवाने के बाद अजय यादव ऑनलाईन ट्रांजक्शन के लिए MPIN और अन्य लॉगिन संबंधी प्राक्रिया पूरी कर स्वयं ही 10 रुपये महिला के खाते में भेजकर चेक किया। कुछ दिन बाद महिला को कंपनी में नौकरी और अनुदान राशि लेने के लिए गुवाहटी जाने का प्रलोभन दिया गया। ऐसे में महिला और उसके पति की फ्लाइट टिकट और होटल में रूकने की व्यवस्था उन्होंने किया।
उसके खाते से विभिन्न ट्रांजेक्शन कराए गए
इसके बाद जब आयशा और उसका पति वहां पहुंचे तो हॉटल में शाम में दो अज्ञात व्यक्ति ने स्वयं को कंपनी की ओर से होना बताकर उनके NGO का बैंक खाता रजिस्टर्ड लेकर मोबाइल पर APK फाईल डाउनलोड किए। इसके बाद बोले कि कंपनी के अधिकारियों के द्वारा समय-समय पर खाते को चेक किया जाएगा। उसके बाद कई बार आकर मोबाईल लेकर उसका खाता को चेक करते थे तथा उनके द्वारा बताया गया कि उस खाते में कोई तकनीकी समस्या आ गई है। इस वजह से रुपये का ट्रांजक्शन नहीं हो पा रहा है। ऐसे में लगभग एक सप्ताह तक उन्हें वहीं रखकर विभिन्न ट्रांजेक्शन कराए गए और 12 जनवरी 2026 को उन्हें वापस जाने दिया गया।
बैंक से संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली
जब महिला रायगढ़ लौटी तो उसे बैंक से कॉल आया कि उसके खाते में संदिग्ध लेनदेन हो रहे हैं। 14 जनवरी को बैंक द्वारा बताया गया कि उसके खाते से साइबर फ्रॉड की गतिविधियां हो रही है। बाद में महिला को अलग-अलग राज्यों से मेल प्राप्त हुए, जिनमें उसके खाते में साइबर फ्रॉड से संबंधित विवादित रकम जमा होने की जानकारी दी गई।
महिला की शिकायत पर अपराध दर्ज
जांच में पता चला कि 29 दिसंबर 2025 से ही उसके खाते में लगभग करोड़ों का संदिग्ध ट्रांजेक्शन शुरू हो गए थे। जब महिला ने इस बारे में विजय चंद्रा से संपर्क किया तो उसने बैंक की गलती बताकर समय मांगा, लेकिन बाद में संपर्क से गायब हो गया। ऐसे में महिला की शिकायत पर साइबर पुलिस थाना में धारा 318(4), 3(5) बीएनएस के तहत अपराध पंजीबद्ध कर जांच शुरू की गई।
आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया
महिला से पूछताछ कर अंतरराज्यीय साइबर ठगी से जुड़े पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों में मितेश सोनी 31 साल निवासी वसुंधरा नगर भिलाई-3 जिला दुर्ग, विजय चंद्रा 35 साल निवासी ग्राम कटौत थाना डभरा जिला सक्ती, अजय साहू 35 साल निवासी ढिमरापुर चौक थाना सिटी कोतवाली, अभय यादव 23 साल निवासी कौहाकुंडा पहाड़ मंदिर और सचिन चौहान 24 साल निवासी कलमीडिपा शामिल है।
साइबर फ्रॉड गैंग बैंक खाते उपलब्ध कराते थे
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी अभय यादव पहले एक स्थानीय बैंक में कार्य कर चुका है। उसकी पहचान विजय चंद्रा से थी और विजय चंद्रा की पहचान अजय साहू और मितेश सोनी से हुई, जो पहले से साइबर फ्रॉड गैंग से जुड़ा था। इसी के माध्यम से अभय यादव, विजय चंद्रा, अजय और सचिन चौहान को टेलीग्राम ग्रुप में जोड़ा गया। जहां से उन्हें कॉरपोरेट बैंक अकाउंट उपलब्ध कराने का काम सौंपा गया। आरोपी विभिन्न राज्यों में सक्रिय साइबर फ्रॉड गैंग को ऐसे बैंक खाते उपलब्ध कराते थे, जिनका उपयोग साइबर ठगी के पैसे ट्रांजेक्शन के लिए किया जाता था और इसके बदले उन्हें फ्रॉड से प्राप्त रकम का 5 से 15 प्रतिशत कमीशन मिलता था।
संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी पुलिस को दे
ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराध में शामिल गिरोहों के खिलाफ रायगढ़ पुलिस लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है। आम नागरिकों से अपील है कि किसी भी प्रकार के लालच या अनजान लिंक, ऐप और वित्तीय लेनदेन से सावधान रहें। साथ ही संदिग्ध गतिविधि की जानकारी होने पर तत्काल पुलिस को इसकी सूचना दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
