Vedant Samachar

छत्तीसगढ़ राज्यसभा चुनाव : कांग्रेस ने फूलो देवी नेताम पर फिर जताया भरोसा, भाजपा ने लक्ष्मी वर्मा को बनाया उम्मीदवार

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छत्तीसगढ़ में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। राज्य की एक सीट के लिए प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपने-अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है। कांग्रेस ने एक बार फिर से फूलो देवी नेताम पर भरोसा जताते हुए उन्हें दोबारा राज्यसभा का टिकट दिया है, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने लक्ष्मी वर्मा को अपना उम्मीदवार घोषित किया है।

कांग्रेस की ओर से घोषित उम्मीदवार फूलो देवी नेताम वर्तमान में महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। उनका राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त होने वाला है और जिन सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनमें उनका नाम भी शामिल है। इसके बावजूद पार्टी नेतृत्व ने उनके कामकाज और संगठन में सक्रिय भूमिका को देखते हुए उन्हें दोबारा मौका दिया है। इसे संगठन में उनकी मजबूत पकड़ और महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, उम्मीदवार चयन से पहले पार्टी हाईकमान ने संभावित नामों पर गहन मंथन किया था। चर्चा में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व पीसीसी अध्यक्ष मोहन मरकाम, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री टी.एस. सिंह देव के नामों पर भी विचार किया गया। हालांकि अंततः पार्टी ने अनुभव और संगठनात्मक संतुलन को ध्यान में रखते हुए फूलो देवी नेताम के नाम पर मुहर लगा दी।

वहीं दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने भी अपने उम्मीदवार के चयन को लेकर मंथन किया। पार्टी हाईकमान ने सात संभावित नामों के पैनल में से तीन नामों को अंतिम रूप दिया था, जिनमें लक्ष्मी वर्मा, नारायण चंदेल और डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी शामिल थे। अंततः पार्टी ने लक्ष्मी वर्मा को उम्मीदवार बनाने का निर्णय लिया।

लक्ष्मी वर्मा पिछले लगभग 30 वर्षों से सक्रिय राजनीति में हैं और संगठनात्मक स्तर पर उनकी मजबूत पहचान मानी जाती है। भाजपा में लंबे समय से यह चर्चा थी कि राज्यसभा के लिए संगठनात्मक अनुभव, सामाजिक समीकरण और महिला प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता दी जाएगी। इसी रणनीति के तहत पार्टी ने महिला उम्मीदवार को मौका दिया है।

राज्यसभा चुनाव में दोनों प्रमुख दलों द्वारा महिला नेताओं को उम्मीदवार बनाए जाने से राजनीतिक विश्लेषक इसे महिला सशक्तिकरण और सामाजिक संतुलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं। अब सबकी नजरें चुनावी प्रक्रिया और संभावित राजनीतिक समीकरणों पर टिकी हैं।

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