कोरबा, 03 मार्च 2026 (वेदांत समाचार)। South Eastern Coalfields Limited (एसईसीएल) की दीपका परियोजना ने चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 35 मिलियन टन कोयला उत्पादन कर स्थापना काल से अब तक का सर्वाधिक उत्पादन दर्ज किया है। सालाना 40 मिलियन टन के लक्ष्य के मुकाबले परियोजना अब महज 5 मिलियन टन पीछे है। प्रबंधन का लक्ष्य है कि आगामी 30 दिनों में शेष उत्पादन पूरा कर लिया जाए।
ओपनकास्ट खदानों के विस्तार के लिए भूमि उपलब्धता सबसे महत्वपूर्ण कारक होती है। जमीन संबंधी बाधाओं को दूर करते हुए दीपका प्रबंधन ने अधिग्रहित गांवों में खदान विस्तार की प्रक्रिया को गति दी है। दर्शखांचा, मलगांव और सुआभोड़ी क्षेत्रों में ओवर बर्डन हटाकर नए कोल फेस खोले गए हैं, जिसके बाद कोयला उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ओवर बर्डन हटाने के मामले में भी इस वर्ष रिकॉर्ड स्तर हासिल किया गया है।
अधिग्रहित भूमि पर खनन प्रारंभ होने से मानसून सीजन के दौरान उत्पादन में हुई कमी की भरपाई करने में भी परियोजना सफल रही है। इसके चलते चालू वित्तीय वर्ष में उत्पादन आंकड़ा ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच सका है।
वहीं कुसमुंडा क्षेत्र में रिसदी गांव की 336 एकड़ जमीन को कोल बियरिंग एक्ट के तहत अधिग्रहित किया गया है। प्रभावितों के विस्थापन के बाद यहां खनन कार्य शुरू किया जाएगा। सीआईएल पॉलिसी-2012 के तहत घटते क्रम के आधार पर 168 भू-विस्थापितों को नियमित रोजगार के लिए पात्रता प्रदान की गई है और रोजगार देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। गेवरा बस्ती के अधिग्रहण के लिए तैयार मुआवजा प्रस्ताव मुख्यालय की मंजूरी के लिए भेजा गया है।
एसईसीएल की खदानों के मुहाने पर बसे जटराज, नईबोध, पाली पनिया, भिलाई बाजार, हरदीबाजार, आमगांव, बरकुटा और बाहनपाठ जैसे गांवों के विस्थापन से खदान विस्तार और उत्पादन वृद्धि में सहूलियत मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि भू-विस्थापितों की विभिन्न मांगों और आंदोलनों के कारण विस्तार कार्य प्रभावित हुआ है। प्रबंधन का कहना है कि अगले वित्तीय वर्ष में 200 मिलियन टन से अधिक कोयला उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया जाएगा।
दीपका परियोजना की यह उपलब्धि एसईसीएल के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है और इससे भविष्य की उत्पादन योजनाओं को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
