नई दिल्ली,03मार्च : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने दुनियाभर में चिंता बढ़ा दी है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार पर साफ दिख रहा है। निवेशकों में घबराहट और बाजार में उतार-चढ़ाव तेज हो गया है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो तेल की आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
ब्रेंट क्रूड 5.65 फीसदी की तेजी के साथ 70.86 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। वहीं डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 4.81 फीसदी बढ़कर 71.83 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। कीमतों में यह उछाल युद्ध जैसे हालात और सप्लाई को लेकर आशंकाओं के कारण आया है। बाजार में यह डर है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो दाम और ऊपर जा सकते हैं।
भारत में अभी पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर
तेल की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों के बीच भारत में फिलहाल राहत है। देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने सुबह 6 बजे पेट्रोल-डीजल के नए रेट जारी किए हैं और इनमें कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। दिल्ली में इंडियन ऑयल के पंप पर पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.62 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। हालांकि आने वाले दिनों में हालात बदल सकते हैं।
100 डॉलर के पार जा सकते हैं दाम
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा चला तो कच्चे तेल की कीमतें 110 से 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते दुनिया की करीब 30 फीसदी तेल और एलएनजी सप्लाई होती है। यदि इस मार्ग में रुकावट आती है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल हो सकती है।
भारत के लिए क्यों है चिंता की बात
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से 50 से 60 फीसदी मध्य-पूर्व से आता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से देश में पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम बढ़ सकते हैं। इससे परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ेगी और महंगाई पर दबाव आएगा। आम लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ सकता है।
सरकार की तैयारी
फिलहाल अधिकारियों का कहना है कि कम अवधि के व्यवधान से भारत पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। देश के पास कम से कम 10 दिन का कच्चा तेल भंडार उपलब्ध है और रिफाइनरियों के टैंक भी भरे हुए हैं। यदि हालात ज्यादा बिगड़ते हैं तो भारत रूस, वेनेजुएला, ब्राजील और अफ्रीकी देशों से आयात बढ़ाकर आपूर्ति सुनिश्चित कर सकता है।
