बिलासपुर,01मार्च (वेदांत समाचार)I छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने गुजारा भत्ते की मांग को लेकर लगाई गई महिला की याचिका खारिज करते हुए कहा कि दूसरी शादी करने के लिए पहले पति से तलाक लेना जरूरी है। पहली शादी के कानूनी रूप से अस्तित्व में रहते हुए दूसरी शादी करना, फिर दूसरे पति से गुजारा-भत्ते की मांग करना उचित नहीं है।
दरअसल भिलाई निवासी महिला ने अपने दूसरे पति के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। महिला ने अपनी याचिका में बताया कि 10 जुलाई 2020 को आर्य समाज मंदिर में उसकी शादी हुई थी। महिला ने याचिका में आरोप लगाया कि पति ने उसे प्रताड़ित कर घर से निकाल दिया। जिसके बाद उसने फैमिली कोर्ट में दूसरे पति से भरण-पोषण की मांग करते हुए याचिका दायर कर दी।
फैमिली कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया। फैमिली कोर्ट के फैसले को महिला ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। महिला ने पति की आय का हवाला देते हुए कहा है कि व्यवसाय से पति को हर महीने पांच लाख रुपये की आय होती है। लिहाजा हर महीने एक लाख रुपये गुजारा भत्ता उसे दिलाया जाए।
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की सिंगल बेंच में हुई, जहां याचिका को खारिज कर दिया गया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि दूसरी शादी करने से पहले तलाक लेना जरूरी है। हिंदू विवाह अधिनियम में इस तरह का प्रविधान नहीं है।
कोर्ट ने कहा- गुजारा भत्ता की मांग अनुचित
कोर्ट ने कहा कि पहली शादी के कानूनी रूप से अस्तित्व में रहते हुए दूसरी शादी करना और फिर दूसरे पति से गुजारा भत्ता की मांग करना कानूनन उचित नहीं है। हाई कोर्ट ने कहा कि मामले की सुनवाई के दौरान परिवार न्यायालय ने पाया कि महिला ने खुद को अविवाहित बताते हुए दूसरी शादी की रस्म निभाई थी।
हाई कोर्ट ने कहा कि दुर्ग फैमिली कोर्ट के 20 जनवरी 2026 के आदेश में कोई त्रुटि नहीं है। फैमिली कोर्ट के फैसले को यथावत रखते हुए दूसरे पति से मेंटेनेंस की मांग संबंधी महिला की याचिका को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
