Vedant Samachar

अमेरिका-इस्राइल के हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत

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तेहरान/नई दिल्ली,01मार्च । ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत की पुष्टि ईरानी राज्य मीडिया ने की है। रिपोर्ट के मुताबिक 86 वर्षीय खामेनेई की जान अमेरिका और इस्राइल के संयुक्त हमलों में गई। घटना के बाद ईरान सरकार ने देश में 40 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है।

ईरानी सरकारी टीवी और समाचार एजेंसी IRNA ने खामेनेई के निधन की पुष्टि की, हालांकि मौत के सटीक कारणों पर विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई। इस हमले के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

ट्रंप का बयान
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए खामेनेई को “इतिहास के सबसे बुरे लोगों में से एक” बताया। ट्रंप ने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को निष्क्रिय करने के लिए की गई कार्रवाई आवश्यक थी और यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।

परिवार के सदस्यों की भी मौत का दावा
ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि हमलों में खामेनेई के परिवार के कुछ सदस्य—उनकी बेटी, पोते, बहू और दामाद—भी मारे गए। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

कौन थे अली खामेनेई?
अयातुल्ला अली खामेनेई 1989 से ईरान के सुप्रीम लीडर थे। उन्होंने रुहोल्लाह खुमैनी के निधन के बाद यह पद संभाला था, जिन्होंने 1979 की इस्लामी क्रांति का नेतृत्व किया था। सुप्रीम लीडर के रूप में खामेनेई देश की सेना, न्यायपालिका और प्रमुख नीतिगत फैसलों पर अंतिम अधिकार रखते थे।

ईरान में मिश्रित प्रतिक्रिया
खामेनेई की मौत के बाद ईरान के अलग-अलग हिस्सों से मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ स्थानों पर शोक और आक्रोश देखा गया, वहीं कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स में जश्न की खबरें भी सामने आईं। ईरानी एक्टिविस्ट मसीह अलीनेजाद ने एक वीडियो साझा कर इसे “नई शुरुआत” बताया।

बढ़ते तनाव की पृष्ठभूमि
अमेरिका और इस्राइल की ओर से यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब पिछले कई महीनों से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव बढ़ा हुआ था। हमलों के बाद ईरान ने पलटवार की चेतावनी दी है और क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि खामेनेई की मौत ईरान की आंतरिक राजनीति और पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति पर गहरा प्रभाव डाल सकती है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें ईरान की अगली राजनीतिक और सैन्य रणनीति पर टिकी हैं।

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