कोरबा। जिले के दीपका-गेवरा क्षेत्र स्थित एशिया की सबसे बड़ी कोयला खदानों में शुमार South Eastern Coalfields Limited (एसईसीएल) के गेवरा प्रोजेक्ट में भारी परिवहन संकट सामने आया है। जानकारी के अनुसार, कोयला परिवहन में लगी कई भारी वाहन (डंपर/ट्रक) महीनों से ब्रेकडाउन की स्थिति में खड़ी हैं, जिससे उत्पादन और आपूर्ति व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
सूत्रों का कहना है कि संबंधित वाहनों की आपूर्ति निजी ठेकेदार कंपनी द्वारा की गई थी, जिसे इनके नियमित मेंटेनेंस की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। हालांकि, लंबे समय से मरम्मत और रखरखाव कार्य ठप पड़े होने के कारण दर्जनों वाहन उपयोग से बाहर हैं। इससे कोयला ढुलाई बाधित हुई है और कंपनी को कथित रूप से करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
इस पूरे मामले में प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। चर्चा है कि यदि ठेके की शर्तों का उल्लंघन हुआ है तो अब तक संबंधित ठेकेदार पर पेनल्टी क्यों नहीं लगाई गई। यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वाहन आपूर्ति करने वाली कंपनी कौन है और मेंटेनेंस में लापरवाही के लिए उस पर क्या कार्रवाई प्रस्तावित है।
गेवरा खदान, जो Coal India Limited की प्रमुख इकाइयों में से एक है, वहां इस प्रकार की स्थिति से उत्पादन लक्ष्य प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय स्तर पर इसे संभावित प्रशासनिक लापरवाही और ठेका प्रबंधन की कमजोरी से जोड़कर देखा जा रहा है।
अब देखना होगा कि एसईसीएल प्रबंधन इस मामले में क्या जांच और दंडात्मक कार्रवाई करता है, ताकि उत्पादन व्यवस्था सुचारू हो सके और राजस्व हानि पर रोक लगाई जा सके।
