बिलासपुर,25 फरवरी(वेदांत समाचार) । छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अरपा नदी से अवैध रेत उत्खनन पर प्रतिबंध लगाया है। लेकिन इसके बावजूद शहर से लगे नेशनल हाईवे-130 के आसपास सेंदरी, घुटकू, लोखंडी, मंगला, छठघाट, दो मुहानी और ढेका में रेत खनन किया जा रहा है। ड्रोन कैमरे से अवैध खनन का वीडियो बनाया, जिसमें नदी के बीच एक साथ दर्जनों ट्रैक्टर रेत निकालते नजर आए। प्रशासन का दावा है कि खनिज विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम सक्रिय है।
लेकिन मौके पर न तो जांच होती दिखी और न ही परिवहन रोकने की कोई कार्रवाई। रविवार रात करीब 3 बजे सेंदरी घाट पर ड्रोन से ली गई तस्वीरों में 9 ट्रैक्टर रेत लोड करते दिखे। घुटकू घाट पर भी इसी तरह अवैध खनन जारी मिला।
घाटों तक जाने वाले रास्तों में जगह-जगह रोड़े और रेत के ढेर लगाए गए हैं, ताकि बाहरी लोगों की पहुंच मुश्किल हो सके। पूरी रात रेत का अवैध परिवहन होता रहा, लेकिन खनिज विभाग या पुलिस की टीम मौके पर नजर नहीं आई। यह स्थिति तब है जब हाल ही में रेत माफिया ने एक नायब तहसीलदार को कुचलने की कोशिश की थी। इस पूरे मामले में खनिज विभाग के उप संचालक केके गोलघाटे का पक्ष लेने के लिए कॉल-मैसेज किया गया, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। जिले में अमलडीहा, उदईबंद, सोढ़ाखुर्द और करहीकछार घाट ही वैध घोषित हैं। इसके बावजूद रोजाना 15 से 20 घाटों से अवैध रूप से रेत निकाली जा रही है। भास्कर टीम जब सेंदरी घाट पहुंची तो पुल के नीचे से लगातार ट्रैक्टर निकलते दिखे।
मौके पर पांच ट्रैक्टर रेत लेकर बाहर जाते नजर आए। वहीं दो युवक संदिग्ध स्थिति में मौजूद थे। उनकी गतिविधियों से साफ था कि उन्हें विशेष रूप से निगरानी और सूचना देने के लिए तैनात किया गया है। इसके बाद टीम घुटकू रेत घाट पहुंची। यहां भी इसी तरह का संगठित नेटवर्क सक्रिय मिला। घाट के आसपास दो लोग तैनात थे। घाट पर करीब 10 ट्रैक्टर रेत की लोडिंग में लगे हुए थे। मंगला रोड से करीब दो किलोमीटर दूर मेन रोड से करीब 200 मीटर अंदर लोखंडी के रामघाट में खुलेआम रेत का अवैध खनन चल रहा है। साफ रेत निकालने के लिए अरपा नदी के बीच बहाव में 25 से ज्यादा ट्रैक्टर उतारे जा रहे हैं। दोपहर करीब 2 बजे ड्रोन से 150 मीटर ऊंचाई से ली गई तस्वीर में 22 ट्रैक्टर साफ नजर आए। रामघाट तक पहुंचने के तीन रास्ते हैं, बिलासपुर-रायपुर नेशनल हाईवे से, सेंदरी बाइपास होते हुए कोनी की ओर और तीसरा स्थानीय मार्ग।
इन्हीं रास्तों से रेत की ढुलाई की जा रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, घाट के आसपास कुछ लोग मोबाइल लेकर खड़े रहते हैं और कार्रवाई की भनक लगते ही तुरंत सूचना पहुंचा देते हैं। ऐसे में 20 से 30 मिनट में पूरा घाट खाली हो जाता है। ट्रैक्टर-ट्रॉला इंजन के साथ तैयार रहते हैं। तेज बहाव में साफ रेत निकालने के लिए ट्रैक्टर नदी के बीच उतारे जाते हैं, और अगर फंस जाएं तो दो-तीन इंजन लगाकर बाहर खींच लिया जाता है।
सत्ताधारी और विपक्षी दल के नेताओं की मिलीभगत के आरोप
रेत के इस अवैध कारोबार में सत्ताधारी और विपक्षी दलों के कुछ नेताओं के साथ-साथ शराब कारोबारी भी भी शामिल बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि जब विभाग के अफसर छापेमारी करने जाते हैं और गाड़ियां जब्त की जाती है तो उनके आका नेता उन्हें छोड़ने के लिए कॉल कर दबाव बनाते हैं।
शराब- पैसे के बदले पूरी रात निगरानी
बताया जा रहा है कि रोजाना रात में लगभग हर रेत घाट पर माफिया के लोग सक्रिय रहते हैं। ट्रैक्टर ड्राइवर, मजदूर और कर्मचारी तक वहां नजर आते हैं। जिन्हें मुखबिरी का जिम्मा दिया जाता है। उनके लिए माफिया शराब का भी इंतजाम करते हैं। पैसे तो मिलते ही हैं, साथ ही पीने के लिए शराब मिलने से वे पूरी रात घाट पर डटे रहते हैं। सुबह होते ही ये लोग घर लौट जाते हैं। घुटकू घाट तक पहुंचना आसान नहीं था। सुनियोजित तरीके से रास्ते में जानबूझकर रेत के ढेर लगा दिए गए थे, ताकि सामान्य वाहन की आवाजाही न हो। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से इन घाटों पर रात के अंधेरे में अवैध खनन और परिवहन हो रहा है। शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से माफियाओं के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं।
