कवर्धा,24फरवरी (वेदांत समाचार)। जिले के शिक्षा विभाग में सामने आए 218 करोड़ रुपये के हिसाब–किताब गायब मामले में दो बाबू के निलंबन और तत्कालीन बीईओ के बचाव की कोशिशों के बीच मामले ने सनसनीखेज़ मोड़ ले लिया है। मामले को लेकर सत्तापक्ष के ही विधायक ने अतारांकित प्रश्न क्रमांक उठाया है जिसके चलते शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है । दो बाबू को निलम्बित कर वाहवाही लूटने वाले विभाग अब तक दोषी बीईओ पर कोई कठोर कार्यवाही नही कर पाया है ।
बाबु का निलंबन साबित करता है कि गड़बड़ी हुई है तो आखिर बीईओ को क्यों बचाया जा रहा है ? बीईओ का बचाने एक दलाल नेता पत्रकार को खबर रोकने दबाव बनाने बीईओ के साथ पत्रकार के घर तक पहुंचते है किंतु सफलता नही मिलने पर जिले के कद्दावर नेता के दरबार मे भी सामाजिक बन्धुओ को लेजाकर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे है । बहरहाल भ्रष्टाचार के मामले में दलाली पर उतरे नेता की छीछालेदर हो रही है । बहरहाल भ्रष्टाचार की पोल खोलती खबर के इस भाग में मेडिकल अवकाश घोटाले की कथा ।
आरटीआई के जरिये मिली जानकारी के मुताबिक चहेते शिक्षकों को मेडिकल अवकाश एकाउंट में अवकाश नही होने के बावजूद मेडिकल अवकाश दिया गया साथ ही अवकाश के दौरान कई शिक्षकों को नियमित वेतन भुगतान भी होता रहा । जिसके पीछे विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी व उनके कर्मियों की मिलीभगत से इनकार नही किया जा सकता ।
जानकारी के मुताबिक एक कर्मचारी को वर्ष में 20 दिन का मेडिकल अवकाश मिलता है नही लेने पर अवकाश अकाउंट में जमा होता है । 10 साल की नौकरी में 200 दिन ही मेडिकल अवकाश मिल पायेगा । 30 साल की नौकरी में 600 दिन ही मेडिकल अवकाश मिल पायेगा किंतु कवर्धा विकास खंड शिक्षा अधिकारीयो ने श्रीमती शकुंतला चौधरी सहायक शिक्षक को 13/2/2019 से 16/06/2021 तक लगातार 855 दिन , 21/2/2022 से 10/04/2022 तक 49 दिन , 8/11/2022 से 29/01/2023 तक 83 दिन , 04/09/2023 से 25/06/2024 तक 295 दिन इस तरह किस्तों में 1282 दिन का मेडिकल अवकाश दिए जाने का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।
हैरानी की बात यह है कि इतने लंबे मेडिकल अवकाश के बावजूद संबंधित शिक्षिका को नियमित रूप से पूरा वेतन भुगतान होता रहा। सवाल यह है कि आखिर किसके संरक्षण में यह खेल खेला गया और किस नियम के तहत वर्षों तक मेडिकल अवकाश स्वीकृत किया जाता रहा? साथ ही उक्त अवकाश सेवा पुस्तिका में इंद्राज भी नही किया गया जिसके चलते मामले में तत्कालीन बीईओ की भूमिका कटघरे में है ।
मामले में तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) एम एल पटैला व संजय जासवालकी भूमिका अब गंभीर रूप से संदिग्ध मानी जा रही है। सूत्रों का दावा है कि आर्थिक लाभ लेकर मामले को दबाने और लीपापोती करने की कोशिश की गई। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि सुनियोजित भ्रष्टाचार का मामला बनता है।
इसी तरह लखीराम बरिहा सहायक शिक्षक को 11/09/2018 से लेकर 31/10/2024 तक 11 किस्तों में 265 दिन का मेडिकल अवकाश दिया गया । जबकि उनके खाते में उतना अवकाश था ही नही ।
प्यारे सिंह राजपूत प्रधानपाठक को 3 बार मे 130 दिन का मेडिकल अवकाश दिया गया किंतु उनकी सेवा पुस्तिका में दर्ज नही किया गया । प्रधान पाठक कुम्भकरण कौशिक को 218 दिन लगतार के साथ कुल 238 दिन का मेडिकल अवकाश दिया गया । अन्य शिक्षकों की तरह इनका अवकाश भी सर्विस बुक में प्रविष्ठ नही किया गया है । सहायक शिक्षक संगीता को 132 दिन का मेडिकल अवकाश दे कर सर्विस बुक में अवकाश खाते में घटाया नही गया ।
जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा गठित आडिट टीम को वर्तमान विकास खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा 25/11/2025 को किये गए लेख में लिखा गया है कि “अवकाश सम्बंधित दस्तावेज में उल्लेख किया गया है कि कर्मचारियों द्वारा लिये गये अवकाश को अवकाश लेखा में नही घटाया गया है और ना ही स्वीकृति आदेश जारी हुआ है । परंतु उक्त सभी कर्मचारियों को उनके अवकाश अवधि का वेतन भुगतान कर दिया गया है ।”
बिना अवकाश स्वीकृति मेडिकल फिटनेश के वेतन भुगतान के पीछे लंबे लेनदेन होने की संभावना से इनकार नही किया जा सकता हांलाकि मामले को लेकर तत्तकालीन बीईओ संजय जायसवाल अपने आपको पाकसाफ व ईमानदार बताते हुए फंसाये जाने की बात कहते है।
अब सच क्या है यह तो ईमानदारी से जांच के बाद ही सामने आ पायेगा बहरहाल आगामी अंकों में पति की जगह भाई को अनुकंपा नियुक्ति की शिकायत , विकास पब्लिक स्कूल को फर्जी तरीके से मान्यता देने , कुम्भकरण कौशिक शिक्षक के मेडिकल बिल गायब होने की लापरवाही और जाँच रिपोर्ट का खुलासा करेंगे ।
1282 दिन का अवकाश, लाखों का भुगतान!
लगभग साढ़े तीन साल से भी अधिक समय का मेडिकल अवकाश, बिना प्रभावी मेडिकल सत्यापन, बिना सेवा शर्तों के पालन और बिना वेतन रोके! यह पूरा मामला शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली की पोल खोलता है और एक बड़े लेन-देन की आशंका को और मजबूत करता है।
बहरहाल मेडिकल अवकाश को लेकर जिला ट्रेजरी आफिसर ने बताया कि प्रत्येक शासकीय कर्मचारी को प्रत्येक वर्ष 20 दिन मेडिकल अवकाश की पात्रता होती है । अवकाश नही लेने पर लिव अकाउंट में छुट्टियां जमा होती रहती है । कर्मचारी के लिव एकाउंट में जितना अवकाश होता है उतना ही मिलता है अधिक होने पर नो वर्क नो पेमेंट मानते हुए अवकाश स्वीकृत हो जाता है । किंतु बिना स्वीकृति के वेतन दिया जाना गंभीर अनियमितता है ।
जिला शिक्षा अधिकारी एफ आर वर्मा ने मामले को गंभीर बताते हुए जांच कराए जाने और उच्चाधिकारियो को कार्यवाही हेतु पत्र प्रेषित करने की बात कही है।
