लखन गोस्वामी/ कोरबा,24फरवरी (वेदांत समाचार)। जिले के करतला विकासखंड स्थित जनपद पंचायत में अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि अधिकांश कर्मचारी अपने निर्धारित मुख्यालय में निवास नहीं करते और बाहर से आना-जाना करते हैं, जबकि करतला में उनके लिए शासकीय आवास की व्यवस्था उपलब्ध है। इसके कारण कार्यालयीन कार्यों में देरी हो रही है और क्षेत्र की 78 ग्राम पंचायतों से जुड़े विकास एवं जनकल्याणकारी कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
जनपद पंचायत राज्य और केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रमुख एजेंसी होती है। इसके माध्यम से सामाजिक सुरक्षा पेंशन, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन, विधवा एवं निःशक्त पेंशन, राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन, मुख्यमंत्री पेंशन योजना, तीर्थ यात्रा योजना, राशन कार्ड और जन्म-मृत्यु पंजीयन जैसी अनेक योजनाएं संचालित होती हैं। लेकिन कर्मचारियों के मुख्यालय में निवास नहीं करने और समय पर कार्यालय नहीं पहुंचने के कारण इन योजनाओं के संचालन और मॉनिटरिंग पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
नियमों के अनुसार शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने मुख्यालय या उसके आठ किलोमीटर के दायरे में निवास करना अनिवार्य है, ताकि वे समय पर कार्यालय पहुंचकर कार्यों का निष्पादन कर सकें। इसके बावजूद कई कर्मचारी कोरबा सहित अन्य स्थानों से आना-जाना कर रहे हैं, जिससे ग्रामीणों को आवश्यक जानकारी और सेवाएं समय पर नहीं मिल पा रही हैं।
एसडीओ की उपस्थिति पर भी सवाल
जनपद पंचायत कार्यालय में अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) की अनुपस्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारियों के अनुसार एसडीओ के बारे में अक्सर बताया जाता है कि वे फील्ड में हैं, लेकिन क्षेत्र में उनकी उपस्थिति कम ही दिखाई देती है। बताया जाता है कि वे कोरबा से आना-जाना करते हैं और सप्ताह में केवल एक दिन कुछ घंटों के लिए कार्यालय में बैठते हैं। इससे विभागीय कार्यों की गति प्रभावित हो रही है और पंचायतों के विकास कार्यों की निगरानी में भी कमी आ रही है।
जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों में निर्माण और विकास कार्यों को समय पर पूरा कराने की जिम्मेदारी जनपद स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों की होती है। ऐसे में उनकी अनुपस्थिति और लापरवाही से ग्रामीण विकास की योजनाओं का लाभ हितग्राहियों तक समय पर नहीं पहुंच पा रहा है।
अब यह देखना होगा कि इस मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर क्या कार्रवाई की जाती है और व्यवस्था में सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं ?
