कोरबा,23 फरवरी (वेदांत समाचार)। जिले के अनुसूचित क्षेत्र में प्रस्तावित कमर्शियल कोल ब्लॉकों के आवंटन को लेकर विरोध तेज हो गया है। छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन अपर कलेक्टर को सौंपते हुए पेशा कानून के कथित उल्लंघन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। परिषद का कहना है कि करतला विकासखंड के कई ग्राम क्षेत्रों में ग्रामसभा की अनुमति के बिना कोल ब्लॉकों के आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है, जो संविधान प्रदत्त अधिकारों के विपरीत है।
परिषद के अनुसार करतला ब्लॉक के करतला साउथ, कलगामार, मदवानी, बताती, कोल्गा वेस्ट और तौलीपाली क्षेत्रों में कमर्शियल माइनिंग के तहत कोल ब्लॉक आवंटन की तैयारी की जा रही है। चूंकि कोरबा जिला पांचवी अनुसूची के अंतर्गत अनुसूचित क्षेत्र में आता है, यहां पेसा अधिनियम (PESA) प्रभावी है। इस अधिनियम के तहत ग्रामसभा की पूर्व स्वीकृति के बिना किसी भी प्रकार की औद्योगिक या खनन परियोजना को अनुमति नहीं दी जा सकती।
परिषद ने ज्ञापन में उल्लेख किया है कि विकास के नाम पर यदि कमर्शियल कोल ब्लॉक और उद्योग स्थापित किए जाते हैं, तो इससे जल, जंगल और जमीन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। आदिवासी समुदाय की आजीविका, सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक अधिकारों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। परिषद का आरोप है कि बिना व्यापक जनसहमति के इस प्रकार की परियोजनाएं आगे बढ़ाना आदिवासी हितों के खिलाफ है।
परिषद के जिलाध्यक्ष वीरसाय धनवार ने बताया कि तीन सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा गया है। इनमें ग्रामसभाओं की अनिवार्य सहमति सुनिश्चित करना, प्रस्तावित कोल ब्लॉकों की प्रक्रिया पर तत्काल रोक तथा आदिवासी क्षेत्रों में संवैधानिक प्रावधानों का कड़ाई से पालन शामिल है। उन्होंने कहा कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने भी पेशा कानून के तहत ग्रामसभाओं के अधिकारों के पक्ष में महत्वपूर्ण निर्णय दिए हैं, जो संविधान की मूल भावना और आदिवासी परंपराओं के संरक्षण को बल देते हैं।
परिषद ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन किया जाएगा। प्रशासन ने ज्ञापन प्राप्त कर उचित स्तर पर भेजने का आश्वासन दिया है।
