सियोल/नई दिल्ली ,19 फरवरी। दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल को देश में जबरन मार्शल लॉ लागू करने और बगावत के आरोप में दोषी ठहराते हुए अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। अभियोजन पक्ष ने उनके लिए मृत्युदंड की मांग की थी, लेकिन अदालत ने आजीवन कारावास का फैसला सुनाया।
अदालत की टिप्पणी
सियोल सेंट्रल कोर्ट के जज जी कुई-योन ने कहा कि यून ने सैन्य और पुलिस बलों को इकट्ठा कर नेशनल असेंबली पर अवैध कब्जा करने, राजनेताओं को गिरफ्तार करने और निरंकुश सत्ता स्थापित करने की कोशिश की। अदालत ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गंभीर हमला माना। यून इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील कर सकते हैं।
मौत की सजा की मांग
विशेष अभियोजक ने यून के लिए मौत की सजा की मांग की थी, यह कहते हुए कि उनका कदम देश के लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा था। हालांकि विश्लेषकों का मानना था कि चूंकि इस घटनाक्रम में जनहानि नहीं हुई, इसलिए उम्रकैद की सजा पर्याप्त है। दक्षिण कोरिया में 1997 के बाद से किसी भी दोषी को फांसी नहीं दी गई है।
अन्य अधिकारियों को भी सजा
अदालत ने पूर्व रक्षा मंत्री किम योंग ह्यून को मार्शल लॉ लागू करने की योजना में केंद्रीय भूमिका निभाने के आरोप में 30 साल की सजा सुनाई। इसके अलावा कैबिनेट के अन्य सदस्यों को भी दोषी ठहराया गया।
पूर्व प्रधानमंत्री हान डक सू को 23 वर्ष की सजा सुनाई गई। उन पर कैबिनेट बैठक के जरिए आदेश को वैध ठहराने, रिकॉर्ड में हेरफेर और शपथ के तहत झूठ बोलने का आरोप था। उन्होंने फैसले के खिलाफ अपील दायर की है।
क्या था मामला
दिसंबर 2024 में यून ने राष्ट्र-विरोधी ताकतों को रोकने का हवाला देते हुए मार्शल लॉ लागू किया था। यह आदेश लगभग छह घंटे तक प्रभावी रहा। बाद में विधायकों ने सैन्य घेराबंदी तोड़कर सदन में प्रवेश किया और सर्वसम्मति से इसे निरस्त कर दिया।
14 दिसंबर 2024 को सांसदों द्वारा महाभियोग पारित किए जाने के बाद यून को पद से हटा दिया गया था। अप्रैल 2025 में सांविधानिक अदालत ने उन्हें औपचारिक रूप से पदच्युत कर दिया। जुलाई से वे विभिन्न आपराधिक मामलों में हिरासत में हैं।
यह फैसला दक्षिण कोरिया की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है और इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
