रायपुर,16 फरवरी(वेदांत समाचार)। ऑनलाइन वर्क-फ्रॉम-होम जॉब के नाम पर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन साइबर शील्ड के तहत रेंज साइबर थाना पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने फरार चल रहे दो मुख्य आरोपियों आशीष परिहार और लक्ष्मन देवासी को राजस्थान से गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों के विरुद्ध देश के विभिन्न साइबर सेल और थानों में कुल 13 प्रकरण दर्ज पाए गए हैं।
रेंज पुलिस महानिरीक्षक अमरेश मिश्रा के निर्देश पर साइबर अपराधों में संलिप्त मुख्य आरोपियों के विरुद्ध तकनीकी साक्ष्य एकत्र कर लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में ऑनलाइन वर्क-फ्रॉम-होम के माध्यम से अधिक मुनाफा कमाने का झांसा देकर की गई ठगी के मामलों की जांच तेज की गई।
मामले में थाना राखी और धरसीवां में अलग-अलग अपराध दर्ज किए गए थे। प्रार्थी पारस कुमार धीवर ने थाना राखी में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उन्हें वर्क-फ्रॉम-होम जॉब का झांसा देकर 24 लाख रुपये की साइबर ठगी की गई। इस पर अपराध क्रमांक 224/24 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 3(5) में मामला दर्ज किया गया। इसी तरह प्रार्थी ललित साहू ने थाना धरसीवां में 34 लाख रुपये की ठगी की रिपोर्ट दर्ज कराई, जिस पर अपराध क्रमांक 179/24 में धारा 318(4), 3(5) भारतीय न्याय संहिता और 66(D) सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया।
विवेचना के दौरान बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और टेलीग्राम एप से प्राप्त तकनीकी साक्ष्यों का सूक्ष्म विश्लेषण किया गया। विश्लेषण के आधार पर गिरोह के मुख्य सदस्यों की पहचान कर गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमों को राजस्थान और महाराष्ट्र भेजा गया। इस दौरान पहले ही तीन आरोपियों भवानी सिंह (अजमेर), उत्पल पंचारिया (जोधपुर) और साहिल संतोष (नासिक) को गिरफ्तार किया जा चुका था।
आगे की कार्रवाई में दो अन्य मुख्य आरोपी आशीष परिहार निवासी डेराथू, नसीराबाद जिला अजमेर और लक्ष्मन देवासी निवासी भारला पाली, राजस्थान को भी गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ और रिकॉर्ड जांच में सामने आया कि दोनों आरोपियों के खिलाफ विभिन्न राज्यों के साइबर सेल और थानों में भी अनेक मामले दर्ज हैं। पुलिस ने दोनों को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है।
पुलिस ने आम नागरिकों को आगाह किया है कि वर्क-फ्रॉम-होम के नाम पर टास्क, लाइक या रिव्यू के बदले मोटी कमाई का लालच, जॉइनिंग से पहले रजिस्ट्रेशन या सिक्योरिटी फीस की मांग, व्हाट्सएप या टेलीग्राम पर फर्जी एचआर कॉल, संदिग्ध लिंक या ऐप डाउनलोड करवाना और बैंक/यूपीआई की गोपनीय जानकारी मांगना साइबर ठगी के प्रमुख संकेत हैं। लोगों से अपील की गई है कि किसी भी नौकरी के लिए अग्रिम फीस न दें, कंपनी की आधिकारिक जानकारी की जांच करें, अनजान लिंक न खोलें, केवल अधिकृत ऐप स्टोर से ही एप डाउनलोड करें और सभी लेनदेन के स्क्रीनशॉट व विवरण सुरक्षित रखें।
