कोरबा। कल यानी मंगलवार, 17 फरवरी (फाल्गुन अमावस्या) को सूर्य ग्रहण हो रहा है, लेकिन ये ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा, इसकारण देश में इस ग्रहण का सूतक नहीं रहेगा। पूरे दिन फाल्गुन अमावस्या से जुड़े शुभ काम किए जा सकेंगे। 17 फरवरी को सूर्य ग्रहण होगा। ये सूर्य ग्रहण वलयाकार दिखेगा यानी जब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाता और सूर्य का बाहरी भाग एक चमकदार अंगूठी (रिंग ऑफ फायर) के रूप में दिखाई देता है।
यह खगोलीय घटना तब होती है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच से गुजरता है और सूर्य का प्रकाश आंशिक रूप से पृथ्वी तक पहुंचने से रोक लेता है। वलयाकार ग्रहण में चंद्रमा सूर्य के आकार से थोड़ा छोटा दिखाई देता है, इसलिए सूर्य के केंद्र को ढकते हुए भी सूर्य पूरी तरह छिप नहीं पाता, जिससे प्रकाश की चमक एक वलय की तरह बनती है।
कहां-कहां दिखेगा यह ग्रहण
यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। सूर्य ग्रहण अंटार्कटिका में वलयाकार दिखेगा। दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में आंशिक सूर्य ग्रहण दिखेगा। महासागरों हिंद, अटलांटिक और पेसिफिक के कुछ क्षेत्रों में भी ग्रहण के आंशिक रूप से दिखाई देगा।
भारतीय समयानुसार ग्रहण दोपहर में लगभग 3.26 बजे शुरू होगा। ग्रहण की समाप्ति शाम को लगभग 7.57 बजे होगा। मान्यता है कि ग्रहण के समय जब सूर्य का प्रकाश पृथ्वी पर नहीं पहुंचता है, तब तीन लोकों स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल पर प्रभाव पड़ता है। ग्रंथों में इस समय को अशुभ माना गया है। इसलिए सूर्य ग्रहण के समय विवाह, जनेऊ संस्कार, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक काम नहीं किए जाते हैं। इस दौरान पूजा-पाठ भी नहीं की जाती है। ग्रहण के समय में मानसिक रूप से मंत्र जप किए जाते हैं और जरूरतमंद लोगों को दान-पुण्य किया जाता है। सूतक काल वह समय है जो सूर्य ग्रहण शुरू होने से करीब 12 घंटे पहले शुरू हो जाता है और ग्रहण खत्म होने के साथ खत्म होता है। चूंकि 17 फरवरी का ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल भारत में मान्य नहीं होगा।
फाल्गुन अमावस्या पर करें ये शुभ काम
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, इस सूर्य ग्रहण का सूतक नहीं रहेगा, इसलिए पूरे दिन फाल्गुन पूर्णिमा से जुड़े धर्म-कर्म किए जा सकेंगे। इस दिन नदी स्नान, दान-पुण्य, पूजा-पाठ, पितरों के लिए श्राद्ध-तर्पण कर सकते हैं। हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें।शिवलिंग पर जल-दूध चढ़ाएं। बिल्व पत्र, आंकड़े के फूल, धतूरा, गुलाब चढ़ाएं। भगवान को चंदन का लेप लगाएं। धूप-दीप जलाएं। मिठाई का भोग लगाएं। आरती करें। ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें। भगवान विष्णु और महालक्ष्मी का अभिषेक करें। ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें। बाल गोपाल को माखन-मिश्री का भोग लगाएं। कृं कृष्णाय नम: मंत्र का जप करें।
