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सिद्धि की रात या अनजाने में अपराध ? महाशिवरात्रि की पूजा में इन 5 बातों का रखें खास ख्याल

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महाशिवरात्रि केवल एक व्रत या उपवास नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ जुडऩे की वह दिव्य रात है, जिसका इंतजार हर शिव भक्त को पूरे साल रहता है। शास्त्रों में इस रात को सिद्धि की रात कहा गया है, जहां महादेव की कृपा पाना सबसे सरल होता है।

महाशिवरात्रि केवल एक व्रत या उपवास नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ जुडऩे की वह दिव्य रात है, जिसका इंतजार हर शिव भक्त को पूरे साल रहता है। शास्त्रों में इस रात को सिद्धि की रात कहा गया है, जहां महादेव की कृपा पाना सबसे सरल होता है। लेकिन अक्सर भक्त अपनी अटूट श्रद्धा के बावजूद अनजाने में कुछ ऐसी तकनीकी और आध्यात्मिक चूक कर बैठते हैं, जिससे उनकी पूरी मेहनत और भक्ति का फल निष्फल हो सकता है। भक्ति के मार्ग में भाव सर्वोपरि है, परंतु मर्यादा और नियमों का ज्ञान उस भक्ति को पूर्णता प्रदान करता है। शिवलिंग के अभिषेक से लेकर परिक्रमा तक, शास्त्रों ने कुछ ऐसी लक्ष्मण रेखाएं खींची हैं जिन्हें लांघना आपकी पूजा को खंडित कर सकता है। तो आइए जानते हैं उन 5 बड़ी गलतियों का के बारे में, जिन्हें अक्सर लोग सामान्य समझकर दोहराते हैं, लेकिन ये आपकी साधना में बाधक बन सकती हैं।

शिवलिंग पर अर्पित न करें ये चीजें
पूजा के दौरान हम अक्सर भावुक होकर सब कुछ चढ़ा देते हैं, लेकिन महादेव की पूजा में कुछ चीजें वर्जित हैं। शिवलिंग पर कभी भी केतकी का फूल और तुलसी दल न चढ़ाएं। इसके साथ ही, इस बात का विशेष ध्यान रखें कि महादेव को हमेशा बिना टूटा हुआ (अखंडित) बेलपत्र ही अर्पित करें। कटा-फटा बेलपत्र चढ़ाना शुभ नहीं माना जाता।

शंख का प्रयोग और कुमकुम से परहेज
भगवान शिव के अभिषेक में कभी भी शंख का उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि पौराणिक कथाओं के अनुसार महादेव ने शंखचूड़ का वध किया था। इसके अलावा, शिवलिंग पर हल्दी और कुमकुम (सिंदूर) चढ़ाने से भी बचना चाहिए। भगवान शिव वैरागी हैं और हल्दी-कुमकुम को श्रृंगार व सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इनकी जगह सफेद चंदन या भस्म का प्रयोग करें।

जलधारी को लांघने की भूल न करें
अक्सर मंदिर में भीड़ के कारण लोग शिवलिंग की परिक्रमा करते समय जलधारी (सोमसूत्र) को लांघ जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार, शिवलिंग की कभी भी पूरी परिक्रमा नहीं की जाती। जहाँ से पवित्र जल बाहर निकलता है, वहां रुककर वापस मुड़ जाना चाहिए। जलधारी को लांघना ऊर्जा का अपमान माना जाता है और यह दोषपूर्ण है।

अभिषेक के लिए तांबे के लोटे का सही चुनाव
अगर आप दूध से अभिषेक कर रहे हैं, तो कभी भी तांबे के बर्तन का उपयोग न करें। तांबे के संपर्क में आते ही दूध ‘विष’ के समान हो जाता है। दूध के लिए स्टील, चांदी या पीतल के लोटे का प्रयोग करें। तांबे के लोटे का उपयोग केवल गंगाजल या सादा जल चढ़ाने के लिए ही करना चाहिए।

रात के जागरण में आलस्य न करें
महाशिवरात्रि की रात को जागृति की रात कहा जाता है। यदि आप व्रत रख रहे हैं और रात में सो जाते हैं, तो साधना अधूरी मानी जाती है। इस रात को सोने की बजाय शिव पुराण का पाठ, मंत्र जाप या कीर्तन करना चाहिए। विशेष रूप से चार प्रहर की पूजा का संकल्प लेने वालों को रात भर रीढ़ की हड्डी सीधी रखकर ध्यान करना चाहिए।

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