Vedant Samachar

कोरबा : बढ़ी मियाद में भी धान खरीदी लक्ष्य से पीछे जिला, परिवहन व्यवस्था लचर, 250 करोड़ से अधिक का 10.92 लाख क्विंटल धान उपार्जन केंद्रों में जाम

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कोरबा, 08 फरवरी (वेदांत समाचार)। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद टोकन कट चुके किसानों को धान बेचने के लिए दी गई दो दिन की अतिरिक्त मियाद से आकांक्षी जिला कोरबा के 115 किसानों को ही राहत मिल सकी। 5 और 6 फरवरी को अंतिम खरीदी दिवस में इन किसानों ने कुल 8 हजार 980.8 क्विंटल धान समर्थन मूल्य पर बेचा, जिसकी राशि 212 करोड़ 75 लाख 515.2 रुपये बताई जा रही है। इसके साथ ही धान खरीदी का अभियान औपचारिक रूप से समाप्त हो गया, लेकिन इसके बाद जिले में उठाव और परिवहन को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

जारी अंतिम आंकड़ों के अनुसार कोरबा जिले की 41 समितियों के 65 उपार्जन केंद्रों में कुल 43 हजार 861 किसानों ने 27 लाख 47 हजार 101.20 क्विंटल धान समर्थन मूल्य पर शासन को बेचा, जिसकी कुल कीमत 650 करोड़ 78 लाख 82 हजार 742.80 रुपये है। इसके बावजूद जिले के कुल 52 हजार 566 पंजीकृत किसानों में से 8 हजार 875 किसान, यानी 16.57 प्रतिशत किसान, उपार्जन केंद्रों में अपना धान नहीं बेच सके। तय लक्ष्य 31.19 लाख क्विंटल की तुलना में जिला 11.92 प्रतिशत पीछे रह गया और 3 लाख 71 हजार 898.8 क्विंटल धान की आवक नहीं हो सकी।

धान खरीदी पूरी होने के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती खरीदे गए धान का उठाव बन गई है। जिले के उपार्जन केंद्रों में 10 लाख 92 हजार 919.20 क्विंटल धान, जिसकी कीमत लगभग 251 करोड़ 37 लाख 14 हजार 160 रुपये है, अभी भी जाम पड़ा हुआ है। इसमें से करीब ढाई लाख क्विंटल धान का डीओ तक जारी नहीं हो सका है। राइस मिलरों द्वारा रेशियो में बदलाव की अटकलों के चलते ऑनलाइन डीओ रिक्वेस्ट नहीं डाली जा रही, जिससे स्थिति और बिगड़ती जा रही है।

बढ़ती धूप, उठाव की धीमी रफ्तार और राइस मिलरों की मनमानी ने समिति प्रबंधकों की चिंता बढ़ा दी है। यदि समय रहते धान का उठाव नहीं हुआ तो समितियों को शार्टेज के रूप में लाखों रुपये के आर्थिक नुकसान का खतरा सता रहा है। मार्कफेड की परिवहन नीति, जिसमें नजदीकी केंद्रों के धान उठाव को प्राथमिकता दी जा रही है, को भी हालात के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है।

जिले के पांच उपार्जन केंद्रों में 30 हजार क्विंटल से अधिक धान जाम बताया जा रहा है। इनमें नवापारा, बरपाली (कोरबा), बरपाली (बरपाली), भैसमा और सिरमिना शामिल हैं। बरपाली (कोरबा) उपार्जन केंद्र हाथी प्रभावित और सरहदी वनांचल क्षेत्र में स्थित होने के कारण सबसे अधिक प्रभावित है, जहां से धान उठाव का डीओ ही जारी नहीं हो सका है।

इसके अलावा जिले के 15 अन्य उपार्जन केंद्रों में 20 हजार क्विंटल से अधिक धान जाम है। इनमें अखरापाली, उतरदा, बोईदा, कनकी, केरवाद्वारी, कोथारी, कोरबी (पोंडी उपरोड़ा), चैतमा, चिकनीपाली, बेहरचुंवा, फरसवानी, बिंझरा, रामपुर, श्यांग और सोहागपुर शामिल हैं।

समिति प्रबंधकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि राइस मिलर धान परिवहन के दौरान शत-प्रतिशत धान की तौल धर्मकांटा से कराने का दबाव बना रहे हैं, जबकि नियमों के अनुसार केवल 10 से 20 प्रतिशत धान की रेंडम तौल का ही प्रावधान है। ऐसा न करने पर समय पर गाड़ी नहीं लगाने की धमकी दी जा रही है। हालांकि अब तक इस संबंध में कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।

इस पूरे मामले पर जिला विपणन अधिकारी ऋतुराज देवांगन ने कहा कि राइस मिलरों द्वारा ऑनलाइन डीओ रिक्वेस्ट नहीं डालने के कारण ढाई लाख क्विंटल धान का डीओ जारी नहीं हो सका है। शेष धान का प्राथमिकता के साथ उठाव किया जा रहा है और प्रतिदिन औसतन 50 हजार क्विंटल धान का उठाव किया जा रहा है। इसके बावजूद जमीनी हालात यह संकेत दे रहे हैं कि यदि जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी, तो समितियों और शासन दोनों को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है।

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