मुंबई, 04 फरवरी 2026: सोनी सब की पौराणिक गाथा ’गाथा शिव परिवार की- गणेश कार्तिकेय’ भगवान गणेश (निर्णय समाधिया) की दिव्य यात्रा को दर्शाती है, जहाँ वे सिंधुरासुर द्वारा फैलाए गए दोषों का सामना करते हैं। अष्टविनायक की चिंतामणि कथा अपने अंत की ओर बढ़ते हुए एक नए दोष- ईर्ष्या को जन्म देती है। पवित्र गुफा में भगवान गणेश का सामना मत्सरासुर (अनवर खान) से होता है, जो ईर्ष्या और घृणा से प्रेरित है। अपनी बुद्धि और मार्गदर्शन से भगवान गणेश शांति स्थापित करते हैं और दर्शाते हैं कि ईर्ष्या केवल विनाश करती है, जबकि प्रेम और विश्वास सच्ची शक्ति को जन्म देते हैं।

भगवान गणेश पवित्र चिंतामणि को पुनः प्राप्त कर शांति बहाल करते हैं, उसके दुरुपयोग का अंत करते हैं और ज्ञान व न्याय का पाठ पढ़ाते हैं। इस अध्याय के समापन के बाद कथा और गहन तथा भावनात्मक यात्रा की ओर बढ़ती है। देवी पार्वती (श्रेनु पारिख), अपने प्रेम और तपस्या के माध्यम से उस पवित्र गुफा को याद करती हैं, जहाँ उन्होंने भगवान गणेश को पुत्र रूप में पाने की कामना की थी और उनसे पुनः वहाँ जाने का आग्रह करती हैं। भगवान गणेश को ज्ञात नहीं है कि वह गुफा अब मत्सरासुर, यानि ईर्ष्या के असुर के नियंत्रण में है, जो उनके अस्तित्व को स्वीकार नहीं कर सकता और उन्हें नष्ट करना चाहता है। मत्सरासुर अपनी सेना को गाँव में भेजता है, ताकि वे भगवान गणेश को खोज सकें, लेकिन हर नाम उन्हें गणेश से जुड़ा मिलता है, जिससे वे क्रोधित और भ्रमित हो जाते हैं। ईर्ष्या उन्हें अंधा कर देती है, परंतु बुद्धि भगवान गणेश का मार्गदर्शन करती है। शांत भाव से खतरे का सामना करते हुए भगवान गणेश अपना गिरिजात्मज रूप प्रकट करते हैं, ईर्ष्या पर विजय प्राप्त करते हैं और शांति स्थापित करते हैं। यह शक्तिशाली क्षण दर्शाता है कि जन्म केवल शरीर का नहीं होता, बल्कि प्रेम, विश्वास और दृढ़ संकल्प का भी होता है।
निर्णय समाधिया, जो भगवान गणेश की भूमिका निभा रहे हैं, ने साझा किया, “इस प्रसंग ने मुझे सिखाया कि ईर्ष्या इंसान से गलत काम करवा सकती है। मुझे गिरिजात्मज के दृश्य फिल्माते समय बहुत अच्छा लगा, क्योंकि वे दिखाते हैं कि माँ का प्रेम कितना शक्तिशाली होता है। इससे मुझे महसूस हुआ कि प्रेम और विश्वास किसी भी शत्रु से अधिक शक्तिशाली हैं।”
देखिए गणेश कार्तिकेय, हर सोमवार से शनिवार रात 8 बजे, केवल सोनी सब पर।



