नई दिल्ली ,04 फरवरी । पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision–SIR) को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होने जा रही है। इस सुनवाई की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं अदालत में जिरह करती नजर आ सकती हैं। ममता बनर्जी ने इस मामले में सीधे दलीलें रखने के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश से अनुमति मांगी है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी कानूनी टीम के माध्यम से एक अंतरिम आवेदन दायर कर सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि उन्हें स्वयं बहस करने की अनुमति दी जाए। यदि अदालत से मंजूरी मिलती है, तो वह इस संवेदनशील मुद्दे पर अपनी बात सीधे पीठ के सामने रखेंगी।
ECI के SIR आदेश रद्द करने की मांग
अपनी याचिका में ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग द्वारा 24 जून 2025 और 27 अक्टूबर 2025 को जारी किए गए एसआईआर से संबंधित सभी आदेशों और निर्देशों को रद्द करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने अदालत से यह भी अनुरोध किया है कि आगामी विधानसभा चुनाव 2025 की अपरिवर्तित मतदाता सूची के आधार पर कराए जाएं।
ममता बनर्जी का तर्क है कि एसआईआर प्रक्रिया का 2002 की आधारभूत मतदाता सूची पर निर्भर होना और जटिल सत्यापन व्यवस्था अपनाना लाखों वास्तविक मतदाताओं के मताधिकार के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। उनका कहना है कि इससे योग्य मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं।
टीएमसी सांसदों की याचिकाओं पर भी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ आज तृणमूल कांग्रेस सांसदों डेरेक ओ’ब्रायन, डोला सेन और मोस्तरी बानू की याचिकाओं पर भी सुनवाई करेगी। इसके अलावा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से दायर अलग याचिका को भी इसी मामले में सूचीबद्ध किया गया है।
इस सुनवाई को पश्चिम बंगाल की राजनीति और आगामी विधानसभा चुनावों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। अदालत के फैसले पर न केवल चुनावी प्रक्रिया, बल्कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़ी नीतियों पर भी दूरगामी असर पड़ सकता है।



