कोरबा,02 फरवरी(वेदांत समाचार) । “चलो आयुर्वेद की ओर” मिशन के तहत लायंस क्लब कोरबा एवरेस्ट, पतंजलि चिकित्सालय एवं श्री शिव औषधालय के संयुक्त तत्वावधान में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से “बच्चे रहे स्वस्थ” योजना के अंतर्गत स्वर्ण बिन्दु प्राशन संस्कार का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम दिनांक 01 फरवरी 2026, रविवार को अति शुभ रवि पुष्य नक्षत्र में पतंजलि चिकित्सालय एवं श्री शिव औषधालय, महानदी कॉम्प्लेक्स, निहारिका में नाड़ीवैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ।
इस आयुर्वेदिक इम्यूनाइजेशन कार्यक्रम के तहत अंचल के सैकड़ों बच्चों को स्वर्ण बिन्दु प्राशन कराया गया, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य, स्मरण शक्ति और व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। इसी कड़ी में पांच वर्षीय बालक गिरीश चंद्र सोनी के मामले ने सभी का ध्यान आकर्षित किया।
गिरीश की माता बबीता सोनी, निवासी सीएसईबी, ने बताया कि उनका पुत्र पहले अत्यंत संकोची और शांत स्वभाव का था। वह कम बोलता था और पढ़ाई में भी मन नहीं लगता था। ऐसे में वे उसे नाड़ीवैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा के पास लेकर आईं, जहां उन्हें पुष्य नक्षत्र में स्वर्ण बिन्दु प्राशन संस्कार कराने की सलाह दी गई। संस्कार के सेवन के बाद गिरीश का संकोचीपन दूर हो गया और वह पहले की तुलना में अधिक फ्रेंक और संवादशील हो गया।
गिरीश के पिता जगदीश सोनी ने बताया कि अब उनके बेटे की स्मरण शक्ति में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। वह पढ़ाई में मन लगाने लगा है और नियमित रूप से होमवर्क भी करने लगा है। माता-पिता ने इस सकारात्मक बदलाव के लिए पतंजलि चिकित्सालय, श्री शिव औषधालय की संचालिका श्रीमती प्रतिभा शर्मा एवं चिकित्सक नाड़ीवैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें साधुवाद दिया और अन्य अभिभावकों से भी अपने बच्चों को स्वर्ण बिन्दु प्राशन संस्कार कराने की अपील की।
कार्यक्रम के दौरान संकोची स्वभाव का रहा गिरीश अब इतना सक्रिय नजर आया कि उसने चिकित्सक डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा के सामने अपनी नृत्य कला का भी प्रदर्शन किया, जिसे उपस्थित लोगों ने सराहा।
इस अवसर पर नाड़ीवैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने बताया कि स्वर्ण बिन्दु प्राशन संस्कार बच्चों में किए जाने वाले 16 प्रमुख संस्कारों में से एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्कार है। यह हजारों वर्ष पुरानी आयुर्वेदिक टीकाकरण पद्धति है, जिसका उल्लेख काश्यप संहिता एवं सुश्रुत संहिता जैसे प्राचीन आयुर्वेद ग्रंथों में मिलता है। समय के साथ यह संस्कार लगभग विलुप्त हो गया था, जिसे पुनर्जीवित करने का प्रयास संस्थान द्वारा किया जा रहा है, ताकि एक स्वस्थ और निरोगी समाज का निर्माण हो सके।
स्वर्ण बिन्दु प्राशन संस्कार शिविर में नाड़ीवैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा, श्री शिव औषधालय की संचालिका श्रीमती प्रतिभा शर्मा के साथ-साथ नेत्रनंदन साहू, कमल धारिया, अश्वनी बुनकर, सिद्धराम शाहनी, राकेश इस्पात, देवबली कुंभकार एवं पिंकी बरेठ विशेष रूप से उपस्थित रहे और आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।




