बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने वर्ष 2023 में आयोजित लगभग 6,000 कांस्टेबल पदों की भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामले में एक अहम अंतरिम आदेश पारित किया है। न्यायालय ने अगली सुनवाई तक किसी भी प्रकार के नए नियुक्ति पत्र जारी करने पर रोक लगा दी है।
यह मामला वर्ष 2023 में जारी कांस्टेबल भर्ती विज्ञापन से संबंधित है, जिसमें भर्ती प्रक्रिया के दौरान शारीरिक दक्षता परीक्षा (फिजिकल टेस्ट) में गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए थे। फिजिकल टेस्ट के दौरान डेटा रिकॉर्डिंग का कार्य शासन द्वारा आउटसोर्स के माध्यम से टाइम्स टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी को सौंपा गया था। आरोप है कि कंपनी ने निष्पक्षता से कार्य नहीं किया और कुछ अभ्यर्थियों को कथित रूप से पैसों के लेनदेन के जरिए अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
इन आरोपों से आहत होकर जिला सक्ती, बिलासपुर, रायगढ़ एवं मुंगेली के निवासी मनोहर पटेल, विवेक दुबे, मृत्युंजय श्रीवास, कामेश्वर प्रसाद, गजराज पटेल, अजय कुमार, जितेश बघेल, अश्वनी कुमार यादव एवं ईशान सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने अधिवक्ता मतीन सिद्दीक़ी के माध्यम से उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।
मामले की सुनवाई 27 जनवरी को न्यायमूर्ति पार्थ प्रतिम साहू के समक्ष हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने दलील दी कि शासन द्वारा कराई गई जांच रिपोर्ट में स्वयं अधीक्षक पुलिस, जिला बिलासपुर ने यह स्वीकार किया है कि फिजिकल टेस्ट के दौरान कई गंभीर गड़बड़ियां हुईं और गलत डेटा दर्ज किया गया। इसके अलावा, आरोप है कि टाइम्स टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा फिजिकल टेस्ट से संबंधित सीसीटीवी फुटेज भी डिलीट कर दिए गए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायमूर्ति पार्थ प्रतिम साहू ने राज्य शासन को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक कांस्टेबल पदों पर कोई भी नया नियुक्ति आदेश जारी न किया जाए। साथ ही, न्यायालय ने सभी उत्तरवादियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
इस आदेश को राज्य की कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिससे भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है।



