नए 1320 मेगावाट प्लांट को सालाना 65 लाख टन कोयले की जरूरत, एसईसीएल ने खदान विस्तार की तैयारी तेज की
कोरबा,24 जनवरी (वेदांत समाचार)। राज्य बिजली उत्पादन कंपनी के कोरबा पश्चिम स्थित एचटीपीपी (हसदेव ताप विद्युत परियोजना) के दूसरे चरण के तहत 1320 मेगावाट क्षमता के नए पावर प्लांट का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। संयंत्र की भविष्य की कोयला आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए SECL प्रबंधन कुसमुंडा खदान के विस्तार की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
निर्माणाधीन पावर प्लांट की दो नई इकाइयों के अस्तित्व में आने के बाद संयंत्र को सालाना लगभग 65 लाख टन कोयले की आवश्यकता होगी। यह कोयला कोल लिंकेज नीति के तहत Kusmunda Coal Mine से ही आपूर्ति किया जाएगा। इसके चलते कोयला खदान पर एचटीपीपी संयंत्र की निर्भरता और अधिक बढ़ जाएगी।
वर्तमान में कोरबा पश्चिम स्थित Hasdeo Thermal Power Station में 210 मेगावाट क्षमता की चार इकाइयाँ तथा पहले चरण के विस्तार की 500 मेगावाट की एक इकाई संचालित है। इस तरह संयंत्र की कुल उत्पादन क्षमता 1340 मेगावाट है। इन सभी इकाइयों को कुसमुंडा खदान से कन्वेयर बेल्ट के माध्यम से कोयले की आपूर्ति की जाती है।
खदान से पावर प्लांट तक कुल तीन कन्वेयर बेल्ट लाइनें बिछाई गई हैं। इनमें से दो लाइनें 210 मेगावाट की चार इकाइयों के लिए तथा एक लाइन 500 मेगावाट की इकाई के लिए है। वर्तमान में प्रतिदिन औसतन 24 हजार टन कोयले की आपूर्ति एचटीपीपी संयंत्र को की जा रही है। कोल लिंकेज गाइडलाइन के अनुसार दूसरे चरण के विस्तार संयंत्र को भी कुसमुंडा खदान से ही कोयला उपलब्ध कराया जाएगा।
कोयले की बढ़ती मांग को देखते हुए एसईसीएल कुसमुंडा प्रबंधन खदान विस्तार कर उत्पादन बढ़ाने की तैयारी में जुटा है। इसके तहत अधिग्रहित गांव खोडरी और पाली के प्रभावितों को रोजगार उपलब्ध कराकर उन्हें चिन्हित नए बसाहट स्थल पर पुनर्वासित किया जाएगा। कुसमुंडा फोरलेन सड़क के किनारे चयनित स्थल पर सड़क, नाली और अन्य मूलभूत सुविधाएं विकसित करने का कार्य जारी है, ताकि विस्थापन के बाद नए फेस में खनन कार्य आगे बढ़ाया जा सके।
एचटीपीपी के नए संयंत्र की कोयला जरूरतें कन्वेयर बेल्ट से पूरी नहीं हो सकेंगी। ऐसे में रेल मार्ग से कोयला आपूर्ति की योजना तैयार की गई है। संयंत्र से सुराकछार खदान की साइडिंग तक पूर्व से बिछी रेल लाइन का उपयोग किया जाएगा। रेल लाइन के मरम्मतीकरण, परीक्षण और संयंत्र के समीप एमजीआर प्रणाली स्थापित होने के बाद मालगाड़ियों से कोयला परिवहन शुरू किया जाएगा। इसके लिए रेलवे राइट्स के तहत सर्वे भी कराया जा चुका है।
इधर, कुसमुंडा खदान विस्तार के तहत अधिग्रहित गांव रिस्दी के प्रभावितों को रोजगार देने की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है। खदान विस्तार के लिए 136.339 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया है। Coal India की आरएंडआर पॉलिसी-2012 के तहत 168 भू-विस्थापितों को एसईसीएल में नौकरी दी जाएगी। रोजगार कटऑफ सूची के आधार पर दिया जाएगा। पहले प्रत्येक खातेदार को नौकरी मिलती थी, लेकिन नई नीति के तहत छोटे खातेदार इस सुविधा से वंचित रह जाते हैं।




