भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने पदभार संभालते ही संगठनात्मक स्तर पर बड़े फैसले लेने शुरू कर दिए हैं। अध्यक्ष बनने के कुछ ही समय बाद नितिन नबीन एक्शन मोड में नजर आए और आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए तीन राज्यों में चुनाव प्रभारी और सह-प्रभारी की नियुक्ति का ऐलान कर दिया। इन नियुक्तियों को पार्टी संगठन को मजबूत करने और चुनावी तैयारियों को धार देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
पार्टी महासचिव अरुण सिंह की ओर से जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, केरल विधानसभा चुनाव, तेलंगाना नगर पालिका व कॉर्पोरेशन चुनाव और ग्रेटर बेंगलुरु नगर निगम चुनाव के लिए अनुभवी नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है। नितिन नबीन ने साफ संकेत दिया है कि पार्टी आगामी चुनावों में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरतना चाहती और इसके लिए मजबूत नेतृत्व टीम मैदान में उतारी जा रही है।
केरल विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े को चुनाव प्रभारी बनाया गया है। उनके साथ केंद्रीय राज्य मंत्री शोभा करंदलजे को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा विनोद तावड़े को चंडीगढ़ के नए मेयर चुनाव की देखरेख की भी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि विनोद तावड़े के संगठनात्मक अनुभव का केरल जैसे चुनौतीपूर्ण राज्य में लाभ मिलेगा।
तेलंगाना में होने वाले नगर पालिका और कॉर्पोरेशन चुनावों के लिए आशीष शेलार को चुनाव प्रभारी नियुक्त किया गया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, तेलंगाना में शहरी क्षेत्रों पर विशेष फोकस करते हुए भाजपा अनुभवी और आक्रामक रणनीति के साथ चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।
वहीं, ग्रेटर बेंगलुरु नगर निगम चुनाव के लिए भी भाजपा ने मजबूत टीम गठित की है। राम माधव को चुनाव प्रभारी बनाया गया है, जबकि राजस्थान प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष सतीश पूनिया को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सतीश पूनिया की यह नियुक्ति उनके सक्रिय राजनीति में मजबूत वापसी के संकेत के तौर पर देखी जा रही है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद से वह पार्टी में नई भूमिका के इंतजार में थे, हालांकि हाल ही में हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा की ऐतिहासिक जीत में उनकी अहम भूमिका रही थी।
कर्नाटक राज्य चुनाव आयोग के अनुसार ग्रेटर बेंगलुरु नगर निगम के चुनाव अस्थायी रूप से 25 मई के बाद कराए जा सकते हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट की समय-सीमा के तहत ये चुनाव जून 2026 से पहले कराना अनिवार्य है। ऐसे में भाजपा समय से पहले संगठन को मजबूत कर चुनावी मोर्चे पर पूरी तैयारी के साथ उतरना चाहती है।
कुल मिलाकर, राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते ही नितिन नबीन के इन फैसलों ने साफ कर दिया है कि भाजपा आने वाले चुनावों को लेकर पूरी तरह गंभीर है और अनुभवी नेताओं के सहारे हर मोर्चे पर मजबूत प्रदर्शन की रणनीति पर काम कर रही है।



