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महादेव की अनोखी बारात: भूत-प्रेत संग पहुंचे भोलेनाथ, शिव-पार्वती विवाह प्रसंग ने मोहा मन

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कोरबा,16 जनवरी (वेदांत समाचार)। सर्वमंगला नगर में आयोजित सात दिवसीय महाशिवपुराण कथा के चतुर्थ दिवस का प्रसंग अत्यंत भक्तिमय और मनोहारी रहा। व्यासपीठ से आचार्य रमाकांत जी महाराज ने भगवान शिव-पार्वती विवाह एवं अद्भुत शिव बारात का भावपूर्ण वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

आचार्य रमाकांत महाराज ने कथा के दौरान बताया कि भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह केवल दो देवताओं का मिलन नहीं, बल्कि प्रकृति और पुरुष का दिव्य संगम है। जब भगवान शिव दूल्हे के रूप में अपनी बारात लेकर निकले, तो वह ब्रह्मांड की सबसे विलक्षण और अनोखी बारात थी। जहां सामान्य दूल्हे रेशमी वस्त्र और आभूषण धारण करते हैं, वहीं भोलेनाथ जटाओं में गंगा, मस्तक पर चंद्रमा, शरीर पर भस्म और गले में सर्पों का हार धारण किए हुए नंदी पर सवार होकर निकले। उनका यह स्वरूप देख सभी आश्चर्यचकित रह गए।

कथा के दौरान शिव की अद्भुत बारात का जीवंत दृश्य भी प्रस्तुत किया गया। भगवान शिव के दूल्हा रूप के साथ बच्चों ने भूत-प्रेत-पिशाच का रूप धारण कर उत्साहपूर्वक बारात में भाग लिया। यह बारात साईं मंदिर से प्रारंभ होकर कथा स्थल तक पहुंची। ढोल-नगाड़ों और मांदर की थाप पर बाराती झूमते-नाचते रहे। कथा स्थल पर पहुंचते ही शिव-पार्वती विवाह विधि-विधान से संपन्न कराया गया। इस दौरान “ओम नमः शिवाय” और “हर-हर महादेव” के जयघोष से पूरा पंडाल गूंज उठा।

आचार्य रमाकांत जी ने बताया कि शिव ‘पशुपति’ हैं, अर्थात समस्त जीवों के स्वामी। इसलिए उनकी बारात में केवल देवता ही नहीं, बल्कि ऋषि-मुनि, देवगण, भगवान विष्णु, ब्रह्मा और इंद्र अपनी सेनाओं सहित उपस्थित थे। साथ ही समाज द्वारा तिरस्कृत माने जाने वाले भूत, प्रेत, पिशाच, डाकिनी-शाकिनी और विचित्र गण भी नाचते-गाते बारात में शामिल थे। जब यह बारात माता पार्वती के द्वार पर पहुंची और माता मैना ने शिव का रौद्र और विचित्र स्वरूप देखा, तो वे भयभीत हो गईं और अपनी पुत्री का हाथ ऐसे दूल्हे को सौंपने से इंकार कर दिया।

कथा में आगे बताया गया कि माता पार्वती ने अपनी माता को समझाया कि शिव ही सत्य हैं। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान शिव ने अपना चंद्रशेखर स्वरूप प्रकट किया, जिसकी आभा करोड़ों सूर्यों के समान थी। इस दिव्य रूप को देखकर माता मैना मंत्रमुग्ध हो गईं और हर्षोल्लास के साथ पाणिग्रहण संस्कार संपन्न हुआ। आचार्य रमाकांत महाराज ने इस प्रसंग के माध्यम से संदेश दिया कि शिव सबको स्वीकार करने वाले हैं और यह विवाह सिखाता है कि प्रेम और भक्ति में बाहरी रूप नहीं, बल्कि अंतर्मन की पवित्रता का महत्व होता है।

महाशिवपुराण कथा के श्रवण के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा स्थल पर पहुंच रहे हैं। सर्वमंगला नगर, दुरपा, बरमपुर, आजाद नगर, जरहा जेल, चंद्रनगर बसाहट, शांति पारा, बरेठ मोहल्ला, एसजीपीपी कॉलोनी, संगम चौक सहित आसपास के गांवों के श्रद्धालुओं के सहयोग से यह आयोजन बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हो रहा है।

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