Vedant Samachar

चूल्हे से चाय की केतली तक…अनीता ने खुद लिखी आत्मनिर्भरता की कहानी

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एमसीबी, 16 जनवरी 2026/ कभी घर की सीमित आय और रोजमर्रा की चिंताओं में उलझी रहने वाली पंचायत नागपुर की अनीता आज गांव की उन महिलाओं में शामिल हैं, जिनका नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। यह बदलाव किसी चमत्कार का परिणाम नहीं, बल्कि बिहान योजना से जुड़े विश्वास, स्व-सहायता समूह की सामूहिक शक्ति और अनीता की अथक मेहनत से संभव हुआ है। जब अनीता जय माता दी स्व-सहायता समूह से जुड़ीं, तब न उनके पास पूंजी थी और न ही कोई बड़ा सपना। लेकिन समूह बैठकों में आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार की चर्चा ने उनमें आत्मविश्वास जगाया। बिहान योजना के अंतर्गत CIF ऋण, बैंक लिंकेज और PMFME योजना से प्राप्त 39 हजार रुपये की आर्थिक सहायता ने उनके सपनों को आकार देने का अवसर दिया।


अगस्त 2022: जब एक दुकान ने बदली जिंदगी
अगस्त 2022 में अनीता ने गांव के चौराहे पर एक छोटी-सी चाय-नाश्ता दुकान शुरू की। शुरुआत बेहद साधारण थी-एक स्टोव, कुछ बर्तन और ढेर सारा भरोसा। लेकिन स्वाद, स्वच्छता और मुस्कान ने जल्द ही उनकी दुकान को पहचान दिला दी। धीरे-धीरे यह दुकान गांव की सुबह की जरूरत बन गई। आज अनीता को इस व्यवसाय से हर माह 4 से 5 हजार रुपये की नियमित आय हो रही है। इस आमदनी से वे बच्चों की पढ़ाई, घर के खर्च और भविष्य की योजनाओं को आत्मनिर्भर रूप से पूरा कर पा रही हैं। अनीता मुस्कुराते हुए कहती हैं- “अब खर्च से पहले सोचना नहीं पड़ता, क्योंकि कमाने का आत्मविश्वास मिल गया है।”


एक कहानी, जो कई सपनों को हौसला देती है
अनीता की यह सफलता केवल एक दुकान की कहानी नहीं है, बल्कि उस सोच की जीत है जो यह साबित करती है कि ग्रामीण महिलाएं भी सफल उद्यमी बन सकती हैं। बिहान योजना ने अनीता को सिर्फ रोजगार नहीं दिया, बल्कि पहचान, सम्मान और आत्म विश्वास भी दिया है। आज अनीता गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि जब योजना सही हो, समूह का साथ हो और इरादे मजबूत हों, तो आत्मनिर्भरता किसी भी महिला के लिए दूर नहीं रहती।

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