कोरबा, 04 जनवरी (वेदांत समाचार)। आदिवासी विकास परिषद के अध्यक्ष केआर शाह ने प्रदेश की विभिन्न जेलों में बंद आदिवासियों की रिहाई की मांग को लेकर आवाज बुलंद की है। कोरबा प्रवास के दौरान मीडिया से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जानकारी के अभाव, आर्थिक कमजोरी या बेवजह मामलों में फंसने के कारण कई आदिवासी वर्षों से जेल में बंद हैं और अपेक्षा से अधिक सजा भुगत रहे हैं।
केआर शाह ने बताया कि परिषद ऐसे आदिवासियों की पहचान कर उनकी सूची तैयार करेगी, जो कानूनी सहायता के अभाव में जेल में बंद हैं। परिषद की ओर से इन आदिवासियों को पूरी कानूनी मदद उपलब्ध कराई जाएगी, जिसमें वकीलों की फीस सहित सभी खर्च परिषद स्वयं वहन करेगी। उनका कहना है कि इस पहल का उद्देश्य निर्दोष या पीड़ित आदिवासियों को न्याय दिलाकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।
शिक्षा के मुद्दे पर भी परिषद अध्यक्ष ने गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अभाव है, जिसे दूर करना बेहद जरूरी है। इसके लिए उन्होंने सभी आदिवासी बहुल इलाकों में डीपीएस (दिल्ली पब्लिक स्कूल) की तर्ज पर हाई स्कूल खोलने की मांग रखी, ताकि आदिवासी बच्चों को भी बेहतर और समान शिक्षा का अवसर मिल सके।
बस्तर को अलग राज्य बनाए जाने के मुद्दे पर केआर शाह ने समर्थन जताते हुए कहा कि छोटे राज्यों के गठन से क्षेत्रीय विकास को गति मिलती है और स्थानीय समस्याओं का समाधान आसान होता है। उन्होंने कहा कि बस्तर जैसे क्षेत्र के लिए अलग राज्य बनने से वहां के लोगों का समग्र विकास संभव है।
केआर शाह जयपाल सिंह मुंडा की जयंती की तैयारियों के सिलसिले में कोरबा पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने बताया कि जेल में बंद आदिवासियों की रिहाई आदिवासी विकास परिषद की छह प्रमुख मांगों में शामिल है, जिस पर परिषद लगातार संघर्ष और प्रयास करती रहेगी।
