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मुंबई में इतिहास रचा गया: 5,000 किलोमीटर दूर शंघाई से हुई भारत की पहली क्रॉस-बॉर्डर रिमोट रोबोटिक सर्जरी

मुंबई स्थित कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई है। यहां भर्ती मरीजों की सर्जरी 5,000 किलोमीटर दूर चीन के शंघाई शहर से बैठे सर्जन ने सफलतापूर्वक की। यह भारत की पहली क्रॉस-बॉर्डर रिमोट रोबोटिक सर्जरी है, जिसने देश में टेलीसर्जरी के नए युग की शुरुआत कर दी है।

इस ऐतिहासिक सर्जरी को प्रसिद्ध यूरोलॉजिस्ट डॉ. टी.बी. युवराजा ने शंघाई से संचालित किया। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) से मंजूरी मिलने के बाद भारत में पहली बार तौमाई रिमोट रोबोटिक सर्जरी सिस्टम का सीमा-पार उपचार के लिए उपयोग किया गया। इस अत्याधुनिक तकनीक के जरिए मुंबई में दो मरीजों पर जटिल यूरोलॉजिकल सर्जरी की गईं।

जानकारी के अनुसार, मरीजों पर रेडिकल प्रोस्टेटेक्टॉमी और पार्शियल नेफ्रेक्टॉमी जैसी जटिल सर्जरी की गईं, जिन्हें पूरी तरह रोबोटिक तकनीक के माध्यम से अंजाम दिया गया। इन सर्जरी को शंघाई में बैठे विशेषज्ञ सर्जन ने रियल टाइम में रोबोटिक सिस्टम के जरिए नियंत्रित किया, जबकि मरीज मुंबई के अस्पताल में मौजूद थे।

तौमाई रिमोट रोबोटिक सर्जरी सिस्टम वर्तमान में दुनिया का एकमात्र ऐसा रोबोटिक प्लेटफॉर्म है, जिसे टेली-सर्जरी के लिए अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (यूएस एफडीए) द्वारा अध्ययन की मंजूरी प्राप्त है। इस तकनीक को भविष्य की सर्जरी के लिए एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।

अब तक 4,100 से अधिक रोबोटिक सर्जरी कर चुके डॉ. टी.बी. युवराजा ने इस उपलब्धि को स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि यह तकनीक न केवल विशेषज्ञ सर्जनों की पहुंच को वैश्विक बनाएगी, बल्कि दूर-दराज और संसाधनविहीन क्षेत्रों के मरीजों को भी विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाएगी।

कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल के सीईओ और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. संतोष शेट्टी ने कहा कि अंतरमहाद्वीपीय रिमोट सर्जरी करने वाला उनका अस्पताल भारत का पहला संस्थान बन गया है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय मुंबई और शंघाई के डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, तकनीकी विशेषज्ञों और इंजीनियरिंग टीमों के सामूहिक प्रयास को दिया।

डॉ. शेट्टी ने कहा कि यह उपलब्धि न केवल भारत में टेलीसर्जरी के नए युग की शुरुआत है, बल्कि भविष्य में वैश्विक स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा भी तय करेगी। इस तकनीक से समय, दूरी और विशेषज्ञों की कमी जैसी बाधाओं को काफी हद तक दूर किया जा सकेगा।

चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि इस सफलता के बाद भारत टेली-रोबोटिक सर्जरी के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर तेजी से बढ़ सकता है, जिससे देश की स्वास्थ्य प्रणाली को नई मजबूती मिलेगी।

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