Vedant Samachar

वोडाफोन आइडिया को मिली नई ‘संजीवनी’, Tata समेत बड़े निवेशकों ने लगाए 3,300 करोड़!

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वोडाफोन आइडिया (Vi) काफी समय से भारी आर्थिक संकट और कर्ज के बोझ तले दबी हुई है, लेकिन अब कंपनी के लिए बाजार से एक बेहद राहत भरी खबर आई है. देश के बड़े निवेशकों ने कंपनी की साख पर भरोसा जताते हुए अपना खजाना खोल दिया है. खबर है कि टाटा कैपिटल (Tata Capital) जैसी प्रतिष्ठित वित्तीय संस्था ने वोडाफोन आइडिया की ताजा बॉन्ड सेल में करीब 500 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश किया है. कुल मिलाकर कंपनी ने बाजार से 3,300 करोड़ रुपये जुटाए हैं.

टाटा के साथ इन दिग्गजों ने भी लगाई बाजी
इस फंडरेजिंग में टाटा कैपिटल अकेली नहीं है, बल्कि वित्तीय जगत के कई अन्य बड़े खिलाड़ियों ने भी Vi की मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाए हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, जेएम फाइनेंशियल क्रेडिट सॉल्यूशंस, आदित्य बिड़ला कैपिटल और हीरो फिनकॉर्प ने भी लगभग 400-400 करोड़ रुपये निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है. इसके अलावा, नोमुरा कैपिटल ने भी अपने विदेशी और NBFC रूट के जरिए इस फंडिंग राउंड में हिस्सा लिया है. यह कदम दिखाता है कि भले ही मुख्यधारा के बैंक कर्ज देने में कतरा रहे हों, लेकिन गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) को वोडाफोन आइडिया के भविष्य और इसके रिटर्न पर अब भी भरोसा है.

12% ब्याज का ऑफर
यह पूरी प्रक्रिया वोडाफोन आइडिया की पूर्ण स्वामित्व वाली यूनिट ‘वोडाफोन आइडिया टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर’ के जरिए पूरी की गई. बॉन्ड्स को दो हिस्सों (Tranches) में जारी किया गया. ‘सीरीज ए’ के तहत 3,000 करोड़ रुपये जुटाए गए, जिस पर निवेशकों को 12% का आकर्षक ब्याज मिलेगा. वहीं, ‘सीरीज बी’ में 300 करोड़ रुपये 7% ब्याज दर पर जुटाए गए. इन सिक्योरिटीज की मियाद करीब 21 महीने है और एक साल बाद कॉल ऑप्शन की सुविधा भी है. कंपनी इस रकम का इस्तेमाल मुख्य रूप से फाइबर एसेट्स के ट्रांसफर से जुड़े भुगतान और अपने नेटवर्क को बेहतर बनाने (Capex Plans) के लिए करेगी.

क्या वोडाफोन आइडिया के अच्छे दिन आने वाले हैं?
जहां एक तरफ बैंक अपने ‘एक्सपोज़र लिमिट’ और एसेट क्वालिटी की चिंताओं के कारण हाथ खींच रहे हैं, वहीं म्यूचुअल फंड्स और NBFCs ज्यादा रिटर्न (Yield) के लिए जोखिम उठाने को तैयार हैं. वोडाफोन आइडिया के लिए यह फंड एक लाइफलाइन की तरह है. याद दिला दें कि सरकार ने अप्रैल में स्पेक्ट्रम बकाया को इक्विटी में बदलकर कंपनी में 48.99% हिस्सेदारी ले ली थी. इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में AGR बकाये पर राहत देने की याचिका पर विचार करने का संकेत दिया है. अगर ये नया फंड नेटवर्क सुधारने में सही तरीके से इस्तेमाल होता है, तो आने वाले दिनों में कॉल ड्रॉप और इंटरनेट स्पीड की समस्याओं से जूझ रहे आम यूजर्स को बड़ी राहत मिल सकती है.

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