कोरबा,18 दिसंबर (वेदांत समाचार)। जिले के प्रगति नगर दीपिका स्थित श्रमवीर स्टेडियम में इन दिनों श्रीकृष्ण भागवत ज्ञान यज्ञ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इस पावन आयोजन का संचालन कोरबा जिले के वृंदावन से पधारे सुप्रसिद्ध कथावाचक पंडित श्याम सुंदर पाराशर महाराज द्वारा किया जा रहा है। भागवत कथा के शुभारंभ अवसर पर महाराज जी ने पत्रकारों से संवाद करते हुए अपने जीवन, शिक्षा और आध्यात्मिक उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला।
पंडित श्याम सुंदर पाराशर महाराज ने बताया कि वे बचपन से ही आध्यात्मिक वातावरण में पले-बढ़े और प्रारंभ से ही शास्त्रों के अध्ययन में उनकी गहरी रुचि रही है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के साथ-साथ श्रीमद्भागवत, व्याकरण एवं संस्कृत की विधिवत शिक्षा श्री धर्मसंघ संस्कृत विद्यालय, वृंदावन से प्राप्त की। कठोर साधना, गुरु कृपा और निरंतर अध्ययन के बल पर आज वे देशभर में एक ख्यातिप्राप्त कथावाचक के रूप में पहचाने जाते हैं।
महाराज जी ने कहा कि भागवत कथा केवल कथा-वाचन नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला आध्यात्मिक मार्गदर्शन है। उनकी कथा की विशेषता यह है कि वे श्रीमद्भागवत के प्रत्येक श्लोक की गहन और सरल व्याख्या करते हैं, जिससे श्रोता शास्त्रों के भावार्थ को सहजता से समझ सकें। उन्होंने विश्वासपूर्वक कहा कि जब कथा सच्चे भाव, शुद्ध उच्चारण और भक्ति के साथ कही जाती है, तब उसमें स्वयं माँ सरस्वती का वास होता है।

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि वृंदावन में उनके द्वारा पाराशर अध्यात्म पीठ की स्थापना की गई है। इस पीठ का मुख्य उद्देश्य युवाओं और समाज के सभी वर्गों में आध्यात्मिक चेतना का विकास करना, संस्कारों को सुदृढ़ करना तथा सनातन संस्कृति के मूल्यों का प्रचार-प्रसार करना है। पीठ के माध्यम से नियमित रूप से कथा, सत्संग, प्रवचन एवं आध्यात्मिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
श्रमवीर स्टेडियम में आयोजित श्रीकृष्ण भागवत ज्ञान यज्ञ में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। कथा के दौरान वातावरण भक्ति, संगीत और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आ रहा है। श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंगों, लीलाओं और उपदेशों को सुनकर भाव-विभोर हो रहे हैं।
महाराज जी ने कहा कि भागवत कथा का मुख्य उद्देश्य लोगों को भक्ति, सदाचार और मानवता के मार्ग पर अग्रसर करना है। आज के भौतिक युग में जब मनुष्य तनाव और अशांति से घिरा हुआ है, तब भागवत जैसे ग्रंथ जीवन में संतुलन, शांति और सकारात्मक सोच प्रदान करते हैं। उन्होंने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में कथा में शामिल होकर आध्यात्मिक लाभ लेने का आह्वान किया।
