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वेदांता एल्युमीनियम ने जारी की सतत विकास रिपोर्ट: भारत की नेट ज़ीरो यात्रा में अग्रणी भूमिका…

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0 कार्बन तीव्रता में 8.96% की कमी, 1,500 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा योजना और 100% अपशिष्ट पुनर्चक्रण से स्थिरता की दिशा में बड़ा कदम

रायपुर,04नवंबर (वेदांत समाचार) । भारत की सबसे बड़ी एल्युमीनियम उत्पादक कंपनी वेदांता एल्युमीनियम ने अपने सतत विकास रिपोर्ट वित्तीय वर्ष 2025 (FY25) जारी कर स्थिरता के क्षेत्र में अपनी अग्रणी भूमिका को और मजबूत किया है। रिपोर्ट में कंपनी की डिकार्बोनाइजेशन, नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने और सर्कुलर इकॉनमी में की गई उल्लेखनीय उपलब्धियों को रेखांकित किया गया है। यह रिपोर्ट भारत के नेट ज़ीरो 2070 विज़न के अनुरूप एक अधिक टिकाऊ औद्योगिक भविष्य की दिशा में कंपनी के प्रयासों को दर्शाती है।

कार्बन तीव्रता में 8.96% की कमी

वेदांता एल्युमीनियम ने एफवाई21 के आधार वर्ष से अब तक कार्बन तीव्रता में 8.96% की कमी दर्ज की है, जिससे यह अब 17.01 टीसीओ₂ई प्रति टन एल्युमीनियम पर पहुंच गई है — जो अब तक का सबसे कम स्तर है। यह सफलता कंपनी की ऊर्जा दक्षता, तकनीकी नवाचार और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग से संभव हुई है।

1,500 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा की योजना

कंपनी ने वर्ष 2030 तक 1,500 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा पीपीए (Power Purchase Agreements) के माध्यम से प्राप्त करने की योजना बनाई है। इससे कंपनी के परिचालन भारत की नेट ज़ीरो महत्वाकांक्षा और कम-कार्बन एल्युमीनियम की वैश्विक मांग के अनुरूप होंगे।

इसके अलावा, वेदांता ने गेल गैस लिमिटेड के साथ साझेदारी की है, जिसके तहत झारसुगुड़ा स्मेल्टर को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति की जाएगी। यह परिवर्तन 2025 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है, जिससे प्रति वर्ष 47,000 टन से अधिक सीओ₂ उत्सर्जन में कमी आएगी। गेल 7.5 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन का निर्माण कर रही है, जो प्रतिदिन 32,000 एससीएम प्राकृतिक गैस की आपूर्ति करेगी।

सर्कुलर इकॉनमी में अग्रणी भूमिका

वेदांता एल्युमीनियम ने अपशिष्ट प्रबंधन में भी नए मानक स्थापित किए हैं। कंपनी ने 100% से अधिक फ्लाई ऐश उपयोग हासिल किया है, जिसमें 12.08 मिलियन मीट्रिक टन (एमटी) फ्लाई ऐश को सीमेंट निर्माण, ईंट निर्माण, सड़क निर्माण और खदान पुनर्स्थापन जैसे कार्यों में उपयोग किया गया।

साथ ही, एफवाई25 में कंपनी ने 14.6 मिलियन एमटी अपशिष्ट का पुनर्चक्रण और पुनः उपयोग किया, जिससे लैंडफिल उपयोग को न्यूनतम करते हुए सामुदायिक और औद्योगिक मूल्य का सृजन किया गया।

ऊर्जा दक्षता और जल संरक्षण में उपलब्धियां

एफवाई25 में कंपनी ने 1,570 मिलियन यूनिट (एमयू) नवीकरणीय ऊर्जा का उपभोग किया और 378 एमयू ऊर्जा की बचत दर्ज की।
वेदांता ने 16.79 मिलियन घन मीटर पानी का पुनर्चक्रण किया और अपनी सभी इकाइयों में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज नीति बनाए रखी, जिससे जल संरक्षण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है।

नवाचार और तकनीकी प्रगति से सस्टेनेबिलिटी को बल

वेदांता एल्युमीनियम ने 70 से अधिक स्टार्टअप्स के साथ साझेदारी कर 100 से अधिक तकनीक-आधारित प्रोजेक्ट लागू किए हैं। इन प्रोजेक्ट्स में रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, और स्मार्ट सेफ्टी सिस्टम्स शामिल हैं, जिनसे संचालन दक्षता और सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

‘रेस्टोरा’ उत्पाद श्रृंखला से कम-कार्बन भविष्य की दिशा में कदम

कंपनी की प्रमुख उत्पाद श्रृंखला ‘रेस्टोरा’ (लो-कार्बन एल्युमीनियम) और ‘रेस्टोरा अल्ट्रा’ (अल्ट्रा-लो कार्बन एल्युमीनियम) ने जिम्मेदार उत्पादन के नए मानक तय किए हैं। इन उत्पादों का ग्रीनहाउस गैस (जीएचजी) उत्सर्जन स्तर प्रति मीट्रिक टन 4 टीसीओ₂ई से कम है, जो वैश्विक मानक की तुलना में लगभग आधा है।


वेदांता का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक अपने कुल उत्पाद पोर्टफोलियो का 30% हिस्सा इन रेस्टोरा उत्पादों से बने।

सीईओ का बयान: “विकास और जिम्मेदारी साथ-साथ”

वेदांता एल्युमीनियम के सीईओ राजीव कुमार ने कहा —

“स्थिरता हमारे लिए केवल एक अनुपालन प्रक्रिया नहीं, बल्कि विकास के लिए हमारी रणनीतिक दिशा है। एल्यूमिनियम जैसे कठिन-से-कम-होने वाले क्षेत्र में नवाचार, रिन्यूएबल एनर्जी और सर्कुलैरिटी अपनाकर वास्तविक और सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। हमें गर्व है कि हम भारत की नेट ज़ीरो यात्रा का नेतृत्व कर रहे हैं — यह साबित करते हुए कि औद्योगिक प्रगति और पर्यावरणीय जिम्मेदारी साथ-साथ चल सकती हैं।”

भारत के हरित औद्योगिक भविष्य की दिशा में अग्रसर

‘मेक इन इंडिया’ और ‘नेट ज़ीरो 2070’ जैसी राष्ट्रीय पहलों के साथ तालमेल रखते हुए, वेदांता एल्युमीनियम ने जिम्मेदार निर्माण के नए मानक स्थापित किए हैं। कंपनी की पारदर्शी रिपोर्टिंग, मापनीय ईएसजी लक्ष्यों और ठोस प्रदर्शन ने इसे सतत एल्युमीनियम उत्पादन के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी बना दिया है।

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