Vedant Samachar

UPI Transactions: क्‍या UPI Payment करने पर देनी होगी ट्रांजैक्शन फीस? RBI ने दिया ये सिग्‍नल…

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नई दिल्‍ली। बीते कुछ सालों में भारत ने डिजिटल भुगतान की दुनिया में शानदार उपलब्धियां हासिल की हैं। यूपीआई (UPI) ने आम आदमी से लेकर बड़े व्यापारियों तक की लेनदेन प्रक्रिया को पूरी तरह बदल दिया।

हर दिन 60 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन हो रहे हैं। लेकिन अब इस क्रांति पर नए बादल मंडराते दिख रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने संकेत दिए हैं कि अब इस मुफ्त सुविधा का दौर ज्यादा दिनों तक नहीं टिक पाएगा।

टिकाऊपन जरूरी या सहूलियत?
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल ही में एक कार्यक्रम में कहा कि UPI सिस्टम को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी सरकार इस व्यवस्था को सब्सिडी देकर चला रही है। लेकिन, कोई भी मॉडल सब्सिडी के सहारे हमेशा नहीं चल सकता। उनका कहना है कि भुगतान व्यवस्था को सुरक्षित, सरल और टिकाऊ बनाना वक्त की मांग है, और इसके लिए कुछ न कुछ कीमत चुकानी ही पड़ेगी।

क्या अब देना होगा UPI का दाम
UPI पर फिलहाल कोई शुल्क नहीं लगता, लेकिन इस सिस्टम को चलाने में बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स की कुछ लागत लगती है। अभी तक यह खर्च सरकार उठा रही थी। लेकिन अब संकेत साफ हैं कि UPI ट्रांजैक्शन पर मामूली शुल्क लग सकता है। RBI ने यह भी कहा कि एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) नीति पर फैसला अब सरकार के हाथ में है। इसका मतलब है कि व्यापारी और उपभोक्ता दोनों पर इसका असर पड़ सकता है। वैसे यह बदलाव भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए एक नया मोड़ साबित हो सकता है। एक ओर यह कदम डिजिटल इकोनॉमी को सस्टेनेबल बनाएगा, वहीं दूसरी ओर आम जनता को मुफ्त UPIय की आदत को कंट्रोल करना पड़ सकता है। हालांकि इसके लिए बहुत मामूली शुल्‍क लगाए जाने की उम्‍मीद है।

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