कोरबा, 30 दिसंबर (वेदांत समाचार)। जिले के सर्वमंगला चौकी क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सोनपुरी से शनिवार रात करीब 10 बजे कोरबा अस्पताल के लिए निकला एक युवक अस्पताल नहीं पहुंच सका। परिजनों द्वारा कई स्थानों पर तलाश के बाद जब कोई सुराग नहीं मिला तो इसकी सूचना सर्वमंगला चौकी पुलिस को दी गई। सोशल मीडिया के माध्यम से भी युवक की खोजबीन की जा रही थी। इसी बीच रविवार देर शाम सड़क किनारे खदान के मुहाने पर एक शव मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। बाद में शव की पहचान लापता युवक के रूप में हुई।
मृतक की पहचान हरदीबाजार क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बोईदा निवासी 32 वर्षीय चंद्रशेखर मरार, पिता गंगा राम मरार के रूप में की गई है। चंद्रशेखर कुसमुंडा परियोजना के अंतर्गत नीलकंठ कंपनी में ठेका मजदूर के रूप में कार्यरत था। वह अपनी गर्भवती पत्नी के प्रसव के लिए कोरबा के एक अस्पताल आया हुआ था। बच्चे के जन्म के बाद वह खुशी के माहौल में अपने साथियों से मिलने सर्वमंगला चौकी क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सोनपुरी पहुंचा था, जहां उसके कुछ ठेका कर्मी साथी रहते हैं।
साथियों से मिलने के बाद चंद्रशेखर रात करीब 10 बजे अपनी बाइक से कोरबा अस्पताल लौटने के लिए निकला, लेकिन न तो वह अस्पताल पहुंचा और न ही अपने घर। उसका मोबाइल फोन भी बंद आने लगा। काफी देर तक संपर्क न होने पर परिजनों और परिचितों ने आसपास के क्षेत्रों में उसकी तलाश की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल सकी। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।
रविवार देर शाम स्थानीय लोगों ने सड़क किनारे खदान के मुहाने पर एक शव पड़ा देखा, जिसकी सूचना तत्काल पुलिस को दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची, वहीं घटना की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण भी एकत्र हो गए। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि मृतक की बाइक जोड़ा पुल से पहले एक मोड़ के पास अनियंत्रित हो गई थी। बाइक सड़क किनारे पड़े करीब 5 से 7 फीट ऊंचे मिट्टी के टीले को पार करते हुए नीचे नालीनुमा गड्ढे में जा गिरी। हादसे के बाद चंद्रशेखर गंभीर रूप से घायल होकर उसी गड्ढे में गिरा रहा।
बताया जा रहा है कि यह हादसा रात के समय हुआ, जिससे किसी की नजर उस पर नहीं पड़ी। अनुमान है कि वह लगभग 18 घंटे तक घायल अवस्था में नाली में पड़ा रहा। यदि समय रहते किसी को घटना की जानकारी मिल जाती तो संभवतः उसकी जान बचाई जा सकती थी।
घटनास्थल खदान से सटा हुआ क्षेत्र है। खदान में मवेशियों और अनाधिकृत लोगों के प्रवेश को रोकने के लिए सड़क किनारे बड़ी नालीनुमा खुदाई की गई है। खुदाई से निकली मिट्टी को सड़क किनारे ही डाल दिया गया है, जिससे वहां लगभग 5 से 8 फीट ऊंचा मिट्टी का ढेर बन गया है। इसी ढेर के कारण मोड़ पर बाइक सवार का संतुलन बिगड़ा और वह सीधे खदान के मुहाने की नाली में जा गिरा।
घटना की जानकारी मिलते ही क्षेत्र में आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों ने ठेका कंपनी पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मुआवजे की मांग को लेकर काम बंद करवा दिया। देर रात तक चली बातचीत के बाद ठेका कंपनी प्रबंधन द्वारा मृतक के परिजनों को 5 लाख रुपये नगद मुआवजा देने और उसकी पत्नी को पेंशन देने पर सहमति बनी, जिसके बाद ग्रामीणों का आक्रोश शांत हुआ।
फिलहाल पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है। हादसे ने एक बार फिर खदान क्षेत्रों के आसपास सुरक्षा इंतजामों और सड़क किनारे किए गए असुरक्षित निर्माण पर सवाल खड़े कर दिए हैं।



